फैक्टरी फ़ार्मों का 10 सबसे बड़ा मिथक
यदि आप अभी तक पाषाण-काल में नहीं रह रहे हैं, तो आपने "नकली खबर या फ़ेक न्यूज " वाक्यांश जरूर सुना होगा। हालांकि यह वाक्यांश अपेक्षाकृत नया हो सकता है लेकिन जानबूझकर गलत सूचना फ़ैलाना कोई नयी बात नहीं है। फ़ैक्ट्री-फ़ार्मों के किसान दशकों से नकली समाचार फैलाते रहे हैं।

पढ़िए मांस, अंडा एवं डेयरी उद्योग द्वारा फैलाया गया 10 सफ़ेद झूठ:

1. मांस के लिए पाले गए पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार किया जाता है।

यथार्थवादी बनें। भोजन के लिए पाले गए सभी जानवरों को एक भयंकर मौत का सामना करना पड़ता है। पशु वध स्वाभाविक रूप से हिंसक है। कोई पशु मरना नहीं चाहता। मांस उद्योग के लिये "मानवीय" शब्द बिल्कुल निरर्थक है। चूँकि कोई भी सरकारी एजेंसी "मानवीय" शब्द को परिभाषित नहीं करती है, मांस उद्योग इसका नाजायज लाभ उठाते हैं। देखना चाहते हैं, यह नृशंष उद्योग पशुओं के साथ कैसा "मानवीय" व्यवहार करता है? अमेरिकन इंफायन एसोसिएशन द्वारा “मानवीय” प्रमाणित एक वधशाला में हमारे द्वारा किए गए गुप्त जाँच की फ़ुटेज देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए। दुःखद ! यह मानवीय नहीं है।

2. पशु उन्मुक्त जीवन जीते हैं।

आपने प्यारे-प्यारे कार्टून में देखते हैं न वो भोले-भाले फ़ार्म्ड पशुओं के खुशहाल चित्र देखे हैं? अरे, उन चित्रों पर क्षण भर के लिये भी विश्वास नहीं कीजिये। संयुक्त राज्य के अधिकांश फ़ार्म्ड पशुओं को आजीवन घोर पीड़ा उठानी पड़ती है। ये बेचारे पशु तो खचाखच ट्रक में लादकर बध के लिये भेजे जाने से पहले तक सूरज की रोशनी भी नहीं देख पाते

3. मांस संधारणीय होता है।

यह नकली समाचारों का सबसे बड़ा उदाहरण है। इतना बड़ा कि हम सोच भी नहीं सकते! अगर कोई आपको यह बताने की कोशिश करता है कि पशु उत्पाद स्थायी या पर्यावरण के अनुकूल हैं, तो उन्हें उनके तथ्यों की जांच करने के लिए कहें। पशुपालन जलवायु परिवर्तन के लिए प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक है। यह मूल्यवान संसाधनों को भी नष्ट करता है और वनों की कटाई एवं वन्य-जीवों की अनेक प्रजातियों की विलुप्ति में भी इसका बड़ा हाथ है।

4. किसान मांस की खेती करते हैं।

जब मांस उद्योग जनता के सामने पशुओं के साथ अपने व्यवहार का वर्णन करता है, यह वास्तव में बहुत कलात्मकता से काम लेता है। "हत्या" और "कत्लेआम" जैसे शब्दों का प्रयोग करने के बजाय, उद्योग "उत्पादन/हार्वेस्टिंग" अथवा "प्रसंस्करण/प्रोसेसिंग" जैसे हल्के शब्दों का उपयोग करता है। हमने फसलों की कटाई या भुगतान की प्रक्रिया (प्रोसेस) के बारे में सुना है, लेकिन किसी को उल्टा लटका कर गला काटना प्रसंस्करण नहीं है। क्या है यह? नकली समाचार!

5. आपको प्रोटीन के लिए मांस चाहिए।

ओह। बेशक नहीं। मेवा, सेम, टोफू से सीयटन तक, वनस्पति-आधारित खाद्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। आपको पर्याप्त प्रोटीन के लिए मांस की जरूरत नहीं है। यह नकली समाचार है। बस कीजिए।

6. मछली खाना आपके लिए अच्छा है

कम मांसाहार करने का परामर्श शायद गलती से "मछली खाने" के सलाह के रूप में समझ लिया गया है। लेकिन मुर्गे और सूअर के मांस की तरह, मछली भी फाइबर से रहित और संतृप्त वसा एवं कोलेस्ट्रॉल से भरी हुई है। ओमेगा -3 के बारे में क्या? सौभाग्य से, ओमेगा -3 वसा प्राप्त करने के लिए आपको मछली खाने की ज़रूरत नहीं है। इसके बजाय, आप ओमेगा-3 वहाँ से प्राप्त कर सकते हैं जहाँ से मछलियाँ उन्हें प्राप्त करती है। अरे भाई, पौधों से

मछलियाँ सिर्फ़ सिर्फ़ स्वास्थ्य कारणों से ही अभक्षणीय नहीं है बल्कि मछली का मांस गन्दा भी होता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक जाँच में 25 प्रतिशत में गंदगी पाया था। इसके अतिरिक्त, बेल्जियम के शोधकर्ताओं ने पाया कि सी-फ़ूड खाने वाले अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिवर्ष 11,000 प्लास्टिक के छोटे टुकड़े का भी भक्षण कर लेते हैं और दर्जनों अवांछित कण उनके ऊतकों में जमा हो जाते हैं। उफ़...!

7. आपको कैल्शियम के लिए दूध चाहिए।

कैल्शियम और मजबूत हड्डियों के लिए हमें गाय के दूध की जरूरत है, हमें यह समझाने के लिए डेयरी उद्योग मार्केटिंग पर लाखों डॉलर का खर्च करता है। लेकिन यह भी एक जायज जाली समाचार है। गाय का दूध मनुष्यों के लिए केवल अस्वास्थ्यकर ही नहीं है; इसमें निरीह पशुओं की अविश्वसनीय पीड़ा भी निहित है। सौभाग्य से, आप वनस्पति आधारित खाद्य पदार्थों जैसे काएल, बादाम के दूध और अनाज से पर्याप्त कैल्शियम प्राप्त कर सकते हैं।

8. घासाहारी (ग्रास-फेड) गोमांस पृथ्वी के लिए बेहतर है।

कभी सोचिए भी मत! बार्ड कॉलेज में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर गिडॉन सेश के मुताबिक, " संधारणीय या चिरकालिक गोमांस केवल वही गोमांस है जिसका आप कभी उत्पादन या उपभोग नहीं करते हैं।" "बीफ़ और स्थिरता” “युद्ध और भलाई” के समान हैं।" क्या समझे?

9. सभी लोगों के पेट भरने का एकमात्र उपाय फैक्टरी-फ़ार्मिंग ही है।

पर्याप्त भोजन के बिना रह रहे दुनिया में करीब एक अरब लोगों के साथ, मांस की खपत और विश्व की भूख के बीच के संबंध को अनदेखा करना असंभव है। जरा सोचिए, 2012 तक, अमरीका में उत्पादित 95 प्रतिशत जई और 80 प्रतिशत मक्का फ़ार्म्ड पशुओं को खिलाया गया फिर भी 2015 में, 60 लाख से अधिक अमेरिकी परिवारों ने अत्यंत कम खाद्य सुरक्षा की सूचना दी। जो अन्न अमेरिका के फ़ार्म्ड पशुओं को खिला दिया जाता है उससे 80 करोड़ लोगों का पेट भरा जा सकता है।

10. मुर्गा खाना स्वास्थ्यकर है।

द हफ़िंगटन पोस्ट के मुताबिक, फ़ैक्ट्री-फ़ार्मों पर मुर्गे-मुर्गियों को इतनी तेज़ी से बढ़ने के लिए बाध्य किया जाता है कि उनका मांस अत्यधिक वसायुक्त हो जाता है जो कि आपके स्वास्थ्य के लिए उतना हितकर नहीं है जितना कि मांस उद्योग दावा करता है। वास्तव में, आज-कल बेचे जाने वाले मुर्गों में 224 प्रतिशत अधिक वसा और 9 प्रतिशत कम प्रोटीन होता है। इसके अतिरिक्त, एक पाउंड मुर्गे में भी उतना ही कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है जितना कि एक पाउंड लाल मांस (रेड मीट) में। यह भी नकली समाचार!

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मांस उद्योग नकली समाचारों को फैलाना और जनता को गुमराह करना पसंद करता है। सौभाग्य से, आपको उनकी बातें मानने और उनके उत्पाद खरीदने की जरूरत नहीं है। दयापूर्ण वनस्पतिक आहार अपनाकर आप एक साथ पशु, पर्यावरण और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। शुरु करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए।
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