मांस के बारे में 16 असंतोषजनक तथ्य जो आपको संपूर्ण जीवन का पुनर्मूल्यांकण करने पर विवश कर देगा
मांस के बारे में 16 तथ्य जिन्हें जानने के बाद आप एक बार फिर से अपने पूरे जीवन का मूल्यांकण करने पर विवश हो जायेंगे।

1. फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर पशुओं को इतनी तंग जगहों में रखा जाता है कि बेचारे मुड़ भी नहीं सकते न ही आराम से बैठ सकते हैं और ना अपने अंगों को फैला सकते हैं।


2. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बेकन (सूअर का मांस) और हॉट डाग जैसे प्रोसेस्ड मांस को एस्बेस्टस और सिगरेट जैसे कैंसरकारक पदार्थों की श्रेणी में रखा है।


3. खाद्य पशुओं को खिलाने के लिये के लिए उगाये जाने वाले अनाजों के लिये अत्यधिक पानी का अपवव्यय होता है।


4. वयस्कों के आहार में बढ़ रहे सोडियम का प्रमुख स्रोत चिकन (मुर्गी) है।



6. समुद्री भोजन खाने वाले लोग हानिकारक अतिसूक्ष्म प्लास्टिक्स को खा सकते हैं।


7. सूअर के छोटे और बीमार बच्चों को कंक्रीट के फर्श पर सिर के बल पटक कर मार दिया जाता है। इस बर्बर अभ्यास को इस उद्योग की भाषा में थम्पिंग कहा जाता है।


8. 2011 में, यूएसडीए ने रिपोर्ट किया कि कत्लखाने में मारे गये नब्बे प्रतिशत मुर्गियों के कंकालों में कई दोष पाये गये जिनमे, "दृश्यमान विष्ठा संबंधी (मल) प्रदूषण भी शामिल था जिसे देखने में वहाँ के कर्मचारियों द्वारा चूक हो गयी थी।"


9. मांस के लिए पाले जाने वाले मुर्गे-मुर्गियों को तेजी से बढ़ने के लिये नस्लीकृत किया जाता है। वे बेचारे इतने तेजी से बढ़ते हैं कि अक्सर अपने वजन के कारण ही चल-फिर नहीं पाते और आखिरकार कभी खत्म न होने वाले दर्द का शिकार बनकर रह जाते हैं।


10. मेयो क्लिनिक ने पाया कि लंबे समय तक शाकाहारियों की आयु मांस-खाने वाले समकक्षों की तुलना में औसत 3.6 साल अधिक होती है।



12. राष्ट्रीय जर्नल का अनुमान है कि वाणिज्यिक मत्स्य पालन में पकड़े गए 20 प्रतिशत मछली अवांछित मछली है। इसके अतिरिक्त, समुद्री कछुए, सील मछली, व्हेल, पोरपोसेज़, डॉल्फ़िन और शार्क जैसे अन्य जीव अक्सर महाजाल में फंसकर मर जाते हैं।


13. रॉयल सोसायटी ओपन साइंस के अध्ययन में पाया गया कि फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर मछली गंभीर अवसाद से पीड़ित होती हैं और कभी-कभी "ड्रॉप आउट" या निर्जीव रूप से तैरती रहती हैं।

14. सिंघहरण, पूंछ का कतरना, चोंच तोड़ देना, और बधियाकरण जैसे दुर्व्यवहार फैक्ट्री फार्मों पर बिना किसी दर्दनिवारक के रोज़ाना चलाए जाते हैं।


15. फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर अधिकांश गायों, सूअरों और मुर्गियों को सूरज की रोशनी या ताजा हवा में में साँस तब तक नसीब नहीं होता जब तक कि बध के लिये भेजे जाने के लिये ट्रक पर लोड नहीं किया जाता।


16. फ़ैक्ट्री-फ़ार्मों या व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पशु-अत्याचारों को रोकने के लिये बने कानूनी प्रावधान पर्याप्त रूप से कठोर नहीं हैं।


----

परेशान हैं? सौभाग्य से, आप करुणामय शाकाहारी आहार अपना कर हर साल लगभग 30 फ़ार्म्ड पशुओं को बचाने में मदद कर सकते हैं।

शुरु करने के लिये यहाँ यहाँ क्लिक कीजिये !
व्यंजनों, नए उत्पाद टिप्स, और बहुत कुछ के साथ सूचित रहें
और शाकाहारी समाचार