जलवायु परिवर्तन से मौसम हो रहे कठोर ! उपाय क्या है?
जलवायु परिवर्तन के कारण भारी तूफान और अत्यधिक वर्षा से लेकर जंगली आग और विनाशकारी सूखा तक, चरम मौसम आजकल आम बात है।

जलवायु परिवर्तन हमारे समय के सबसे कठिन मुद्दों में से एक है, और वैज्ञानिक यह चेतावनी दे चुके हैं कि अगर हम उचित उपाय नहीं करते हैं, तो चरम मौसम केवल बद से बदतर होता जाएगा। ठीक है, हम से हर कोई इलेक्ट्रिककार या सौर पैनल नहीं खरीद सकता, लेकिन कुछ तो है जो हम सब कर सकते हैं। शाकाहार तो अपना सकते हैं।

लगता है न आसान? दरअसल यह है ही आसान। केवल पशु-उत्पादों का परित्याग कर आप कार्बन-उत्सर्जन में लगभग आधे की की कटौती कर सकते हैं।

दुनियाँ भर के परिवहन के साधनों को एक साथ मिलाने से जितने ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन होता है उससे कहीं अधिक खाने के लिए पाले जाने वाले पशुओं से होता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक, विश्व भर में मानव प्रेरित कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग लगभग 15 प्रतिशत भाग फ़ार्म्ड पशुओं से होता है। इस प्रदुषण में भी मांस और दुग्ध उद्योग की अग्रणी भूमिका है। वास्तव में, यदि हम जीवाश्म ईंधन का प्रयोग करना बंद भी कर दें तो भी सिर्फ़ खाद्य पशुपालन के कारण वर्ष 2030 तक हमारा कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन सीमा 565-गीगाटन पहुँच जायेगा।

जरा इन दृगोन्मेषक तथ्यों पर विचार कीजिये:

एक पौंड सोया की तुलना में एक पाउंड गोमांस के उत्पादन के लिये लगभग 13 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता होती है।

खाद्य पशुओं द्वारा प्रति मिनट 70 लाख पाउंड मल-मूत्र त्याग किया जाता है।

विश्व बैंक के मुताबिक, लगभग 91 प्रतिशतअमेज़ॅन वनक्षेत्र के विनाश के लिए पशु कृषि दोषी है।

खाद्य पशुओं के भोजन के लिये (चारागाह और दाना उगाने सहित) पृथ्वी के लगभग एक तिहाई भू-भाग का इस्तेमाल किया जाता है।

जिस प्रकार जलवायु परिवर्तन की वास्तविकता पर कोई बहस नहीं रह गई है उसी प्रकार इस बात पर भी किसी बहस की गुंजाइश नहीं है कि पशु कृषि हमारे पर्यावरण के लिये भयानक है। मांस, डेयरी और अंडों के बदले उनके शाकाहारी विकल्पों बहुत ही कम संसाधन लगता है। वनस्पतिक आहार अपनाना बहुत आसान है।

वनस्पतिक आहार केवल पर्यावरण के लिए ही अच्छा नहीं है, अपितु यह फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर पीड़ित असंख्य निरीह पशुओं को भी आजीवन पीड़ा से बचाता है। फ़ार्मों पर सूअर, गाय, मुर्गियां, और अन्य पशुओं को कठोर पीड़ा दी जाती है। सच्चाई यह है कि यदि हम सिर्फ एक कुत्ते या बिल्ली के साथ वह व्यवहार करें जो मांस, डेयरी, और अंडा उद्योग पर फ़ार्म्ड पशुओं के साथ दिन-रात किया जाता है तो हम पशु अत्याचार के अपराध में सलाखों के पीछे रहेंगे।

स्वयं देखिये।


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