नये गुप्त वीडियो में जघन्य पशु-अत्याचार का खुलासा
संयुक्तराज्य अमेरिका स्थित जेबीएस के एक आपूर्तिकर्त्ता टोश फ़ार्म्स के स्वामित्व वाले केंटुकी सूअर फ़ार्म पर मर्सी फ़ोर एनिमल द्वारा किये गए एक हालिया गुप्त जाँच में जघन्य पशु-अत्याचारों का पर्दाफ़ाश होता है। जाँचकर्त्ताओं ने देखा कि कर्मचारी पशुओं के चेहरे पर लात-घूसों से मार रहे हैं, सूअर-शिशुओं का अंडकोष बिना किसी दर्दनिवारक दवा के ही निकाला जा रहा है और छोटे-छोटे सूअर शिशुओं को सर के बल फ़र्श पर पटककर निर्दयतापूर्वक मारा जा रहा है।

इस हृदयविदारक अंडरकवर वीडियो फुटेज में यह भी दिखाया गया है कि किस प्रकार बीमार और कमजोर सूअर शिशुओं को बिना किसी समुचित पशु-चिकित्सा के तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है और मादा सूअरों को धातु के इतने तंग पिंजरे में कैदकर दिया जाता है जहाँ वे मुश्किल से मुड़ भी सकें या आराम से लेट सकें। टहलने और अन्य पशुओं के साथ प्राकृतिक गतिविधियों में शामिल होने की तो बात ही छोड़िये। इन भयानक पिंजरों को "जेस्टेशन कैरेट" या "गर्भकालीन डब्बा" कहा जाता है।

जेबीएस विश्व की सबसे बड़ी मांस उत्पादक कंपनी है। जेबीएस संगठन में तीस से अधिक ब्रांड शामिल हैं और इस विशालकाय कंपनी का कार्यालय या यूँ कहें कि वधशाला विश्व के बीस देशों में है। केवल टोश फ़ार्म्स पर ही 30,000 “प्रजनन योग्य शूकरियाँ" कैद रहती हैं जो हर साल 725,000 से अधिक सूअर शिशिओं को जन्म देती हैं।

चूँकि इन संवेदनशील एवं समझदार पशुओं को अप्राकृतिक रूप से अपने लघु जीवनकाल में बारंबार गर्भधारण एवं गर्भकालीन कैद की इतनी पीड़ा झेलनी पड़ती है कि वे अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शिकार हो जाती हैं। जैसे कि मूत्र-नलिकाओं में संक्रमण की बृहत्तर संभावना, कमजोर हड्डियाँ, अत्यधिक बढ़े हुए खुर, लंगरापन एवं एकरसता आदि।

हमारे घर में प्यार से पलने वाले कुत्ते और बिल्लियों की तरह ही सूअर भी खुशी और दुख का अनुभव करने में समान रूप से सक्षम होते हैं। सूअर तीन साल के मानव-शिशु से कहीं अधिक बुद्धिमान होते हैं। दुर्भाग्यवश, जेबीएस फ़ार्म्स पर पाले जा रहे सूअरों के साथ महज एक मांस-उत्पादक मशीन जैसा व्यवहार किया जाता है। उनका छोटा सा जीवन बड़ी-बड़ी विपदाओं से भर जाता है। मानसिक उत्तेजना से वंचित एवं कैद, माता शूकरी उदासी एवं तनाव से पागल हो जाती हैं। वे अपने पिंजरे के छड़ों पर बार-बार दाँत मारती रहती हैं। यह एक गंभीर मानसिक असंतुलन का संकेत है।

आप स्वयं देख लीजिए।


जेस्टेशन कैरेट इतने क्रूर होते हैं कि संयुक्तराज्य अमेरिका, कनाडा, यूरोपीय यूनियन, न्यूज़ीलैण्ड और आस्ट्रेलिया के दस देशों में इन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया है। मैक्डोनल्ड, वालमार्ट, बर्गर किंग और नेस्ले समेत 60 से अधिक बड़ी आहार कंपनियाँ अपने आपूर्ति-क्रम में जेस्टेशन कैरेट को प्रतिबंधित करने वाली नीति का अनुसरण करती है।

एमएफ़ए शीघ्र ही जेबीएस से संपर्ककर तोश फ़ार्म्स के साथ-साथ विश्व भर के उन सूअर फ़ार्मों पर रोक लगाने की माँग करेगा जो इन निरीह पशुओं को ऐसे तंग पिंजरे में कैद रखते हैं जहाँ वे मुश्किल से मुड़ भी सकें। एमएफ़ए उनसे यह भी माँग करेगी कि बिना दर्दनिवारक दवा के सूअर शिशुओं का कष्टदायी अंगभंग जैसे कि अंडकोष को निकाल फ़ेंकना, दंतहरण, पूँछ काटने आदि पर रोक लगायी जाए। इन भयानक यातनाओं का कोई बहाना नहीं हो सकता है। विश्व की सबसे बड़ी मांस कंपनी के रूप में जेबीएस के पास वह शक्ति और जिम्मेदारी है कि वह अपने तमाम आपूर्ति-क्रम (सप्लाय चेन) में निकृष्ट पशु अत्याचारों पर प्रतिबंध लगाए।

आप इस निर्दयता को बंद करवा सकते हैं! अपने मित्र एवं परिजनों को बताइये। शोसल मीडिया पर मर्सी फ़ोर एनिमल का अंडरकवर फ़ुटेज शेयर कीजिए और जेस्टेशन कैरेट को प्रतिबंधित करवाने के लिए इस प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर कीजिए।

हर एक प्रयास महत्वपूर्ण है। याद रखिए, जब भी हम खाने के लिए बैठते हैं, हम पशुओं के प्रति दया का प्रसार कर सकते हैं। सूअरों एवं अन्य पशुओं को अनावश्यक पीड़ा से बचाने के लिए एक सदय मनुष्य जो सबसे अच्छा काम कर सकता है वह यह कि अपनी थाली से सभी प्रकार के पशु उत्पादों को हटा दे और करुणापूर्ण वनस्पतिक आहार शैली अपनाए। देखिए ये वनस्पति आधारित बेकन बनाने की विधि एवं लाजवाब वनस्पतिक साउसेज

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