सात संकेत: आप मांसाहार को लेकर निश्चित नहीं हैं।
1. यदि आप सोचते हैं कि खाने के लिए पाले जाने वाले पशुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है।

अधिकतर खाद्य-पशु कठोर क़ैद, बर्बर अंगभंग और नृशंस हत्या के शिकार होते हैं। उनका अल्प जीवन यातनाओं और कष्ट से भरा होता है।

2. आपको लगता है कि मांसाहार जरूरी है।

नहीं, किसी को भी जीने के लिए पशुओं को खाने की जरूरत नहीं है। सच्चाई इसके विपरीत है। दरअसल, पशु-उत्पादों का परित्याग हैं हमारे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए बड़ा लाभदायक है। आज-कल करोड़ों लोग सुस्वादु एवं मानवीय वनस्पतिक आहार की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं।

3. आपको लगता है कि मांसाहार "प्राकृतिक" है।

हमारे पास शिकार करने वाले जबड़े और नुकीले दाँत नहीं हैं। हमारा पाचन-तंत्र मांस से पोषक तत्त्व प्राप्त करने एवं विषैले तत्त्वों का त्याग करने में उत्तम रूप से सक्षम नहीं होता है। हलाँकि, हमारी शारीरिक संरचना वनस्पति आधारित आहारों के अनुकूल होती है। और, विज्ञान भी प्रमाणित कर चुका है कि प्राकृति वनस्पतिक आहार के अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं।

4. आपको लगता है कि आप पशुओं से प्यार भी कर सकते हैं और उन्हें खा भी सकते हैं।

यदि आप सच में विश्वास करते हैं कि पशुओं को हानि पहुँचाना गलत है तो आपको यह बात अवश्य स्वीकार करनी चाहिए कि पशुओं की हत्या करने का कोई मानवीय तरीका नहीं हैं।

5. आप सोचते हैं कि पौधों में भी संवेदना होती है।

सच में? पौधे सजीव होते हैं, लेकिन उनमें मस्तिष्क या केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र नहीं होता है, जिसका अर्थ है कि वे कुछ भी महसूस नहीं करते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक पाउंड गोमांस के उत्पादन के लिए 16 पाउंड अनाज लग जाता है, तो यदि आप पौधों के बारे में इतने ही चिन्तित हैं तो आपको मांसाहार का त्याग अवश्य ही कर देना चाहिए।

6. आपको लगता है कि आप सिर्फ़ मानवीय तरीके से मारे गये पशुओं का मांस ही खरीदते हैं।

मांस के लिए पाले जाने वाले सभी पशुओं को एक समान बर्बर हिंसा एवं अनावश्यक हत्या का शिकार होना पड़ता है। आप मांस, डेयरी एवं अंडा उत्पादों पर प्रायः "केज-फ़्री", "फ़्री-रेंज" और ऐसे ही आकर्षक लेबल लगे देखेंगे, लेकिन कृपया इनके प्रचार को खरीदने से बचिए

7. आप अपने कुत्ते को कभी चोट नहीं पहुँचाना चाहेंगे।

हम में से अनेक के लिए हमारे पालतू कुत्ते और बिल्लियाँ हमारे परिवार के सदस्य जैसे हैं और हम ध्यानपूर्वक उन्हें खुश रखने का प्रयास करते हैं। वैसे देखा जाए तो बहुत सारे फ़ार्म्ड-पशु भी हमारे कुत्ते और बिल्लियों जैसे ही हैं। उनमें से हर एक का अपना अनोखा व्यक्तित्व होता है, वे भी प्रसन्नता और पीड़ा का अनुभव करते हैं।

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