71 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी। क्या होगा इसका वैश्विक प्रभाव ?
फोर्ब्स में प्रकाशित एक हालिया लेख से पता चलता है कि 15 साल से अधिक उम्र के 71 प्रतिशत भारतीय मांस खाते हैं। एक देश के लिए जिसे बड़े पैमाने पर शाकाहारी माना जाता है, ये विपरीत आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। 1.2 अरब की आबादी में से केवल तैंतिस करोड़ भारतीय शाकाहारी या वनस्पतिक-आहारी के रूप में चिन्हित किये गये हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि के साथ, मांसाहार को अक्सर धनवान होने के लक्षण के रूप में देखा जाता है और हाल के वर्षों में इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। लेकिन यह प्रवृत्ति अन्य देशों और ग्रह (पृथ्वी) को कैसे प्रभावित करती है?

सबसे पहली बात, पशु कृषि जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारक है। मांस उत्पादन के लिए वनस्पति-आधारित भोजन की तुलना में बहुत अधिक संसाधनों का अपव्यय किया जाता है। उदाहरण के लिए, 1 किलो बकरे के मांस के उत्पादन के लिए 8,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, और 1 किलो मुर्गे के लिए 4000 लीटर की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, मुर्गा-उत्पादन प्रति कैलोरी अनाज उत्पादन के मुकाबले 25 गुना अधिक कार्बनडायआक्साइड उत्पन्न करता है। बहुत बुरा, है ना ?!


विश्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक, पशु-कृषि इतने अधिक संसाधनों का उपभोग करता है कि अमेज़ॅन वर्षावन के लगभग 91 प्रतिशत विनाश के लिए सिर्फ़ यही जिम्मेदार है। खाद्य-पशुपालन के लिए पृथ्वी के एक-तिहाई से अधिक भू-भाग का उपयोग किया जाता है। इतना ही नहीं, सभी कारों, विमानों और परिवहन के अन्य माध्यमों को मिलाकर जितने ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है उससे कहीं अधिक तो सिर्फ़ खाद्य-पशुपालन के कारण होता है। पशु-कृषि कारण अब तक दुनिया भर में 500 से अधिक नाइट्रोजनपूरित मृत क्षेत्र बन चुके हैं।

वनस्पतिक आहार चुनकर आप अपने कार्बन उत्सर्जन में लगभग आधे की कटौती कर सकते हैं।

पशु कल्याण की बढ़ती चिंता और पशु कृषि के वैश्विक प्रभाव की अधिक समझ के साथ, वनस्पतिक उत्पादों वाली कंपनियों के लिए पूरे भारत में बहुत सारे अवसर हो सकते हैं। लेकिन भारत की अनूठी विपणन और वितरण संरचना के कारण, यूरोप या अमेरिका के वनस्पतिक उत्पाद यहाँ आसानी से उपलब्ध नहीं है।

किन्तु भारत स्थित नयी कंपनियाँ कंपनी खेल बदल रही है। अभिषेक सिन्हा, स्टेफ़नी डाउस और दीपक परिहार द्वारा स्थापित, कंपनी गुड डॉट भारत में भारत के लिए भारत द्वारा वनस्पति आधारित सस्ते मांस का विकल्प देता है। "हिंसा रहित विकल्प देकर "मानव और पशु दोनों ही प्राणियों की जीवन रक्षा करना" ही इस कंपनी का लक्ष्य है।


सबसे अच्छी बात यह है कि गुड डॉट के उत्पाद न केवल जीएमओ और परिरक्षकरहित (प्रीजर्वेटिवलेस) हैं, बल्कि क्रूरता से मुक्त भी हैं। वे हजारों पशुओं को फ़ैक्ट्री फ़ार्मों की नारकीय पीड़ा से बचाएंगे।

गुड डॉट द्वारा प्रस्तुत मांस के वनस्पतिक विकल्प के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं? यहाँ देखिए हमारी समीक्षा।

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