मांसाहारियों को जानना चाहिए वनस्पतिक आहार से जुड़ी ये 9 बातें
आहार-विहार, आचरण, विचार और धार्मिक विश्वास की दृष्टि से हर शाकाहारी व्यक्ति एक दूसरे से अलग है, लेकिन कुछ ऐसा भी है जो सभी शाकाहारियों को जोड़ता है। और यह पशुओं के प्रति दया रखते हुए पशु-उत्पादों को अपनी थाली से अलग रखना।

आप देख रहे हैं, वनस्पतिक आहार या वीगनिज़्म का संबंध किसी आदर्श या पवित्रता से नहीं है। इसका संबंध एक ऐसे जीवन-शैली से है जो पशुओं को हानि पहुँचाने से दूर एवं एक दयापूर्ण विश्व का समर्थन करता है।

वनस्पतिक आहार अपनाकर आप न केवल अनगिनत पशुओं को मर्मांतक पीड़ा से बचाते हैं, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। दिल की बीमारी और कैंसर के जोखिम को कम करने से लेकर कार्बन उत्सर्जन कम करने तक में सहायक, पूर्ण शाकाहार के बारे में ये बातें मांसाहारियों को जरूर जानना चाहिए।

1. मांसाहार जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों में से एक है।

जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई के लिए पशु कृषि बहुत बड़ा योगदान है। विश्व बैंक के मुताबिक, पशु कृषि अमेजॉन के लगभग 91% विनाश के लिए दोषी है। इससे भी बदतर यह कि पशु-कृषि (एनिमल फ़ार्मिंग) से अकेले इतना ज़्यादा ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है जितना दुनियाँ भर के वाहनों को एक साथ मिला कर भी नहीं होता। सच कहें तो यदि जीवाश्म ईंधन का उपयोग छोड़ भी दें तो सिर्फ़ खाद्य पशुपालन के कारण, वर्ष 2030 तक हमारा कार्बन-उत्सर्जन 565-गीगाटन सीओ2 की सीमा से अधिक हो जाएगा।

2. मांस उद्योग श्रमिकों का शोषण करता है।

फ़ैक्ट्री फ़ार्म के मजदूर कई प्रकार के कार्यस्थलजनित जोखिम के शिकार होते हैं, जिनमें चोट लगना, श्वास रोग, चर्मरोग, पीटीएसडी, और एंटीबायोटिक-प्रतिरोधक बैक्टिरिया का संक्रमण तक शामिल है। हाल की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि हर महीने औसतन एक टायसन कर्मचारी उपकरणों से घायल होकर अपनी अंगुली अथवा कोई और अंग खो देता है।

3. पशु कृषि संसाधनों की अंधाधुंध खपत करती है

कथित तौर पर एक पाउंड सूअर के मांस (पोर्क) के उत्पादन के लिए 576 गैलन पानी का अपव्यय होता है वहीं एक गैलन दूध के उत्पादन के लिए 880 गैलन पानी खर्च होता है। और महज एक पाउंड गोमांस के उत्पादन के लिए 1,79 9 गैलन पानी की विशाल मात्रा का उपयोग होता है। लेकिन मांस उद्योग सिर्फ पानी ही नहीं बर्बाद करता है। एक पाउंड सोया के मुकाबले एक पाउंड गोमांस (बीफ़) को पकाने के लिए 13 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता होती है।

4. मांस आपके स्वास्थ्य के लिए भयानक है

मांसाहार का संबंध हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक, और यहां तक ​​कि कैंसर से जुड़ा हुआ है। वास्तव में, विश्व स्वास्थय संगठन ने भी एक रिपोर्ट जारी किया है कि प्रसंस्कृत मांस (प्रोसेस्ड मीट) उतना ही खतरनाक है जितना सिगरेट। विश्व प्रसिद्ध मेयो क्लिनिक ने पाया कि मांसाहारियों की अपेक्षा लंबे समय तक पूर्ण शाकाहार ग्रहण करने वाले लोगों का जीवन-काल औसतन 3.6 वर्ष तक अधिक होता है। जरा क्षण भर के लिए इस पर भी सोचा जाए।

5. मांस वास्तव में घृणित है

यूएसडीए के मुताबिक, वधशालाओं में मारे गये 90 प्रतिशत मुर्गे-मुर्गियों में कंपनी के कर्मचारियों द्वारा छोड़ दिया गया "दृश्यमान भेसकीय प्रदूषण" पाया गया।" इसके अतिरिक्त, यूएसडीए का अनुमान है कि कटे हुए मुर्गे के मांस का लगभग 25 प्रतिशत और भंडार में बिके लगभग 50 प्रतिशत मुर्गे-मुर्गियाँ साल्मोनेला के संक्रमण से दूषित होते हैं।

साल्मोनेला से ई कोलाई तक, मांस खतरनाक जीवाणुओं से भरा हुआ है। सीडीसी का अनुमान है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया से कम से कम 2 लाख संक्रमण हर साल होते हैं और सेंटर फ़ोर साइंस इन द पब्लिक इंटरेस्ट के मुताबिक 22 प्रतिशत खाद्यजनित रोग इन संक्रमणों से जुड़े है। खतरनाक!

6. पशु कृषि वन्यजीव को मार रही है

वैज्ञानिकों ने हाल ही में चेतावनी दी है कि छठे सामूहिक विलुप्ति के हिस्से के रूप में 2020 तक आधे से अधिक वन्यजीव विलुप्त हो सकते हैं। पर क्यों? अपने भोजन की थाली को ही देख लीजिए। प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, और आवास-हानि के माध्यम से, पशु कृषि वन्यजीव को अपूरनीय क्षति पहुँचा रहा है।

इसके अतिरिक्त, मांस उद्योग के लाभ के लिए बहुत सारे जानवरों को मार दिया जाता है। हर साल भेड़िये, भालू, उत्तरी अमेरिका में पाये जाने वाला रिवर ओटर्स, बाज़ और कोयोट्स जैसे हजारों जंगली जानवरों को मार दिया जाता है, क्योंकि उन्हें पशु कृषि उद्योगों के लिए खतरा माना जाता है।

7. मांस उत्पादन दुनिया की भूख में योगदान देता है

पर्याप्त भोजन के बिना रह रहे दुनिया में करीब एक अरब लोगों के साथ, मांस की खपत और विश्व की भूख के बीच के संबंध को अनदेखा करना असंभव है। मैकगिल विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के 2012 के एक अध्ययन में पाया गया कि दुनिया भर के मनुष्यों को खिलाने के लिए पर्याप्त अनाज का उत्पादन होता है, फिर भी हम इसे जानवरों को क के लिए चुनते हैं ताकि हम मांस खा सकें। 2012 तक, अमरीका में उत्पादित 95 प्रतिशत जई और 80 प्रतिशत मक्का फ़ार्म्ड पशुओं को खिलाया गया फिर भी 2015 में, 60 लाख से अधिक अमेरिकी परिवारों ने अत्यंत कम खाद्य सुरक्षा की सूचना दी। जो अन्न अमेरिका के फ़ार्म्ड पशुओं को खिला दिया जाता है उससे 80 करोड़ लोगों का पेट भरा जा सकता है।

8. मांस, डेयरी और अंडा उद्योग जानवरों को यातना देते हैं।

पोर्क उद्योग में, सूअर-शावक यदि बीमार हैं या तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं तो उन्हें कंक्रीट के फ़र्श पर सिर के बल पटककर मार दिया जाता है। अंडा उद्योग में, (नर) मुर्गों को जिंदा दफ़ना दिया जाता है। जी हाँ, क्योंकि वे अंडे नहीं दे सकते और उतनी तेजी से नहीं बढ़ सकते ताकि उन्हें मांस के रूप में बेचकर लाभ कमाया जा सके, अंडे से निकले इन नर चूजों को ही मार दिया जाता है। ये प्रथा वास्तव में ख़राब हैं, लेकिन उन्हें मानक और स्वीकार्य माना जाता है मगर ये फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर जानवरों के लिए किए गए बहुत ही भयानक चीजों में से दो हैं

9. वनस्पतिक व्यंजन स्वादिष्ट होते हैं

वनस्पतिक आहार के साथ आपके पास होता है सुस्वादु व्यंजनों का विशाल भंडार। संभव है कि पहले से ही आपके कुछ पसंदीदा व्यंजन वनस्पतिक हो लेकिन उनके बारे में शायद आपको पता नहीं है। वनस्पतिक भोजन बनाना चाहते हैं? जरा आजमाइये केरल प्रदेश के ये लजीज वनस्पतिक व्यंजन

सिर्फ़ एक कार्य पशु उत्पादों का परित्याग कर अथवा कम उपभोग कर हम क्रूर मांस उद्योग से पशु, पर्यावरण, अपने स्वास्थ्य और मजदूरों की रक्षा कर सकते हैं।

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