मुर्गियाँ संवेदनशील व समझादर होती हैं! इन्हें खाते क्यों हो ?
हम सब "बर्ड-ब्रेन" की मिथ्या-अवधारणा के बारे में सुन चुके हैं। किन्तु हाल ही में किए गए वैज्ञानिक अनुसंधान में पता चला है कि पक्षियाँ वास्तव में अत्यधिक समझदार होती हैं और दर्द और पीड़ा को अनुभव करने की क्षमता रखती हैं। इनमें वे पक्षियाँ भी शामिल हैं, जिन्हें हम खाते हैं, जैसे कि चिकेन।

भविष्य की घटनाओं का अनुमान करना हो या छुपाकर रखी गयी वस्तुओं को याद करना, मछलियाँ अतुल्य रूप से स्मार्ट होती हैं।

उनमें आत्म-नियंत्रण जैसे गुण भी होते हैं। वे बेहतर भोजन के लिए प्रतीक्षा करते हैं, और चोंच मारने के क्रम में भी अपनी स्थिति का आकलन कर सकते हैं- ये दोनों स्वयं-जागरूकता के लक्षण हैं।

इससे भी आगे, मुर्गे-मुर्गियाँ अपनी नयी पीढ़ियों को ज्ञान का हस्तांतरण करते हैं। ये न केवल अपने सहचर मुर्गे-मुर्गियों बल्कि मनुष्यों समेत 100 व्यक्तिगत चेहरे को भी पहचान सकते हैं। वे यह भी समझ सकते हैं कि अभी तुरत छुपाकर रखी गयी वस्तु अभी भी विद्यमान हो सकती है। यह क्षमता तो दो साल के मानव-शिशुओं में भी नहीं होती।

मुर्गे-मुर्गियाँ दूसरों का ध्यान रखने वाली और संवेदनशील प्राणी होते हैं। जरा इस पर विचार कीजिए: मुर्गियाँ चूजों के जन्म से पहले ही उनसे संवाद करने लगती हैं। चूजे जब अपने शेल में ही होते हैं, मुर्गियाँ उनको हौले से सहलाती है और वे भी उसकी प्रतिक्रिया में चहचहाते हैं। कितनी प्यारी बात है, ना?


हमारे घरों मे प्यार से पलने वाले कुत्तों और बिल्लियों की तरह मुर्गियाँ भी आनंद, अकेला
पन, हताशा, डर और दर्द का अनुभव करती हैं। जब आप उन्हें बिल्लियों की तरह थपथपाते हैं, तो वे भी जवाब में प्यार से कुहकुहाती हैं!


दुर्भाग्य से, मुर्गियाँ इस ग्रह की सबसे अप्रिय प्राणियों में से एक है। वास्तव में, अमेरिका में खाने के लिए पाले और मारे जाने वाले स्थलीय पशुओं में से 98 प्रतिशत मुर्गियाँ ही होती हैं और ये कुछ उन प्राणियों में से हैं, जो सबसे दुखी जीवन जीते हैं। उनका जीवन अकल्पनीय क्रूरता के अधीन होता है।

मांस के लिए पाले जाने वाले मुर्गे-मुर्गियों को अत्यधिक भीड़ भरे तंग, गंदे और अंधकारयुक्त पिंजरों में रखा जाता है। उन्हें तेजी से बढ़ने के लिए इस प्रकार नस्लीकृत किया जाता है कि प्रायः वे अपने ही शरीर के बोझ के कारण चल-फिर नहीं पाते हैं और चिरकालिक घोर पीड़ा के शिकार हो जाते हैं। अतिशय तीव्र शारीरिक विकास के कारण वे हृदयघात एवं कई अंगो में विकृतियों अथवा उनके काम नहीं करने की पीड़ा का भी शिकार हो जाते हैं।

वधशालाओं पर, इन निरीह प्राणियों को उल्टा लटकाकर रखा जाता है, बिजली के झटके और अनेक यंत्रनायें दी जाती है, और अंत में बर्बर तरीके से गला काट कार मार दिया जाता है, अक्सर पूरे होशो-हवास में जबकि वे दर्द महसूस करने में सक्षम होते हैं।


दुनियाँ के सबसे बड़े मुर्गी उत्पादक, टायसन फ़ुड्स पर मर्सी फ़ोर एनिमल द्वारा किए गए अनेक अंडर-कवर जाँचों में मुर्गियों पर अनेक नृशंस अत्याचारों का खुलासा हुआ है। कमजोर और बीमार मुर्गियों को गंदगी के बीच मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। मजदूर उन्हें हिंसक तरीके से मारते-पीटते हैं, और पूरे होशो हवास में इन बेचारे पक्षियों को चीर-फ़ार देते हैं, जबकि वे दर्द और जलन को महसूस कर सकते हैं।

विश्वास नहीं होता? आप स्वयं देख लीजिए।


शुक्र है, हमें स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए इन संवेदनशील एवं बुद्धिमान प्राणियों को खाने की आवश्यकता नहीं है।

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