जलवायु बम: मीथेन के बढ़ते स्तर के लिए जिम्मेदार पशु कृषि
थिंकप्रोग्रेस के अनुसार, संयुक्त ग्लोबल चेंज रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ वैज्ञानिकों द्वारा किये गये एक नये अध्ययन में पाया गया कि पिछले जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट में फ़ैक्ट्री फ़ार्मिंग के पर्यावरणीय कुप्रभावों को बहुत गंभीर रूप से कम करके आंका गया था।

अध्ययन से पता चलता है कि पशु कृषि द्वारा वैश्विक मीथेन उत्पादन के पिछले अनुमानों को लगभग 11 प्रतिशत कम करके अनुमानित किया गया था। यह संभवतः इस कारण से हो सकता है कि शोधकर्ता दो हज़ार के दशक के प्रारंभ से ही बढ़ते मीथेन स्तर का कारण निर्धारित करने में असमर्थ थे।

वाशिंगटन पोस्ट के साथ एक साक्षात्कार में, संबंधित अध्ययन के प्रमुख लेखक, जूली वुल्फ ने कहा:

ज्यादातर विकसित क्षेत्रों में, पशुधन, विशेषतः डेयरी के गायों को को तेजी से बढ़ने के लिये नस्लीकृत किया जाता है। इससे प्रत्येक जानवर द्वारा बड़ी मात्रा में मीथेन का उत्सर्जित होता है।

पिछले साल प्रकाशित एक अन्यअध्ययन में पाया गया कि जीवाश्म ईंधन के उत्पादन या उपयोग की तुलना में कृषि से संबंधित उत्सर्जन वायुमंडलीय मीथेन में वृद्धि के लिए अधिक जिम्मेदार थे। वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि फ़्रैंकिंग आदि के कारण जीवाश्म ईंधन की तुलना में फैक्ट्री फ़ार्मों द्वारा उत्सर्जित मीथेन अधिक तेजी से बढ रहा था।

कई प्रकार के ग्रीनहाउस गैस होते हैं जो वायुमंडल में गर्मी बढ़ाने में योगदान करते हैं,। इनमें से दो सबसे महत्वपूर्ण गैस हैं, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन। हलांकि मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड की तरह वायुमंडल में देर तक नहीं रहता लेकिन, यह गर्मी को अवशोषित करने की अपनी निहित क्षमता के कारण जलवायु के लिए अधिक खतरनाक हो जाता है।

लेकिन जलवायु परिवर्तन में पशु कृषि का योगदान सिर्फ़ मिथेन उत्सर्जन तक ही सीमित नहीं है। यह कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का भी प्रमुख स्रोत है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन ने पाया कि वैश्विक मानव प्रेरित कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन का पंद्रह प्रतिशत भाग फ़ार्म्ड पशुओं द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड के कारण होता है। इसमें भी मांस और दूध उत्पादन उद्योग अग्रणी हैं। वास्तव में, दुनियाँ भर के सभी कार, वायुयान और अन्य परिवहन माध्यमों से संयुक्त रूप से जितना ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है उससे कहीं अधिक खाद्य-पशुओं द्वारा होता है।

हम में से हर एक को अपने पर्यावरण को बचाने के लिए पशु उत्पादों से परहेज करना चाहिए। जब आप इस पर विचार करेंगे कि एक पाउंड सोया के मुकाबले एक पाउंड गोमांस के उत्पादन के लिए 13 प्रतिशत अधिक जीवाश्म ईंधन और 15 गुना अधिक पानी की आवश्यकता होती है तो यह स्पष्ट हो जाता है कि वनस्पतिक आहार अपना कर महज छः महीने में किस प्रकार से मानव-प्रेरित कार्बन-उत्सर्जन में कमी लायी जा सकती है।

शाकाहारी भोजन न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है; यह फ़ैक्ट्री-फ़ार्मों पर आजीवन पीड़ित अनगिनत जानवरों को भी बखूबी बचाता है। भोजन के लिए पाले और मारे गए जानवरों को अकल्पनीय क्रूरता, कठोर कारावास, क्रूर अंगभंग और हिंसक मौतों का शिकार होना पड़ता है।

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