देखिये दुग्ध-उत्पाद में कैसे छुपी है हिंसा  
जब भी हम डेयरी-उद्योगों के गुप्त जाँच की वीडियो पोस्ट करते हैं, हमें लोगों से ऐसी प्रतिक्रिया मिलती है कि जिन दुग्ध-उत्पादों का वे उपभोग करते हैं वो ऐसे भयानक जगहों से नहीं आते हैं। लेकिन हमें वास्तविकता को समझने की जरूरत है। तमाम दुग्ध-उत्पादन सच में क्रूर होते हैं। क्यों? यह जानने के लिये पढ़ना जारी रखिये।

वैसे तो यह स्पष्ट है मगर कई लोग इस पर ध्यान नहीं देते कि गायों को महज दूध देते रहने के लिये गर्भधारण एवं प्रसव की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। कम उम्र की बछड़ियों को आक्रामक एवं तनावपूर्ण कृत्रिम विधि द्वारा गर्भधारण करवाया जाता है।

मनुष्यों की तरह अपनी कोख में नौ महीने तक अपने बच्चे को रखने के बाद मादा गायें अपने बच्चों को जन्म देती है। नवजात गो-शावकों को जन्म के महज चंद घंटों के अंदर ही उनकी माँ से अलग कर दिया जाता है। जी हाँ, यह क्रूर अभ्यास आपके तथाकथित "आर्गेनिक", "हैप्पी" डेयरी फ़ार्मों पर भी चलता है। तो, अब आप उस मार्ग का भी त्याग कर दीजिये।

समझा जा सकता है कि जन्म के महज कुछ घंटो या कुछ दिनों में माँओं से बछड़े-बछियों का यह बलपूर्वक वियोग गायों को व्याकुल कर देता है और बेचारी गायें अपने बच्चों को ढूँढ़ने का असफल यत्न करती रह जाती है। यह हृदविदारक घटना भी हर डेयरी फ़ार्म पर होती रहती है।

ध्यान देने योग्य : 2013 में, न्यूबरी, मेसाचुएट्स के स्थानीय नागरिकों ने एक निकटस्थ डेयरी फ़ार्म पर गायों का करुण क्रंदन सुन [SS1] जाँच के बाद अधिकारियों ने यह पाया कि रोने की यह आवाज उन शोकाकुल माँओं के थे जिनके नवजात शिशु उनसे बलात छीन लिये गये थे।

विज्ञान यह प्रमाणित कर चुका है कि माँ-बच्चों का संबंध केवल मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है। जरा प्रसव की उस पीड़ा और तनाव की कल्पना कीजिये जो बेचारी गायों को बारंबर भोगना पड़ता है और जन्म के बाद उनका बच्चा भी उनसे छीन लिया जाता है।

नर बछड़ों को मांस के लिये मार दिया जाता है और मादाओं को पाला जाता है ताकि वे माँ बन कर ज़्यादा दूध दे सकें। गायों के साथ दुर्व्यवहार का चक्र पाँच सालों या जब तक वे गर्भधारण, प्रसव एवं दूध देने योग्य हों तब तक चलता रहता है और फिर उन्हें “चूकी हुई” समझ कर वध के लिये भेज दिया जाता है। कई जगहों पर बछियों को बेचने के लिये भेज दिया जाता है और उनकी जगह नकली बछड़ों जिन्हें खलबच्चा कहा जाता है, को गायों की आँखों के सामने बाँधकर रखा जाता है ताकि वे अधिक दूध देने के लिये प्रेरित होती रहें।

दक्कन के एक डेयरी फ़ार्म पर खलबच्चा
दुखःद है न? देखिये:


कोई चारा नहीं है ! डेयरी उद्योग पर क्रूरता होती है और हमेशा होती रहेगी।


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