क्या लॉब्स्टर दर्द महसूस करते हैं? देखिए विज्ञान क्या कहता है।
यह एक गलत अवधारना है कि लॉब्स्टर या केंकड़े दर्द महसूस नहीं करते हैं। लेकिन यह सत्य नहीं हो सकता है। दुर्भाग्यवश, ये निरीह प्राणी इन भ्रमित विचारों की कीमत अपनी जान देकर चुकाते हैं। अतः इस मिथक को तोड़ने के लिए कि क्रस्टेशियन (कठोर कवच वाले जीव) दर्द महसूस नहीं करते, प्रस्तुत हैं कुछ तथ्य:

वर्ष 2013 में जर्नल आफ़ एक्स्पेरिमेंटल बायोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया कि यूरोपिय तटीय केंकड़े दर्द महसूस करते हैं। प्रस्तुत अध्ययन के अध्येता, क्वीन्स विश्वविद्यालय बेलफ़ास्ट के प्रोफ़ेसर बाब एल्वुड ने नोट किया कि ये जीव अलग-अलग उत्तेजकों के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं जो इस बात का द्योतक है कि वे दर्द महसूस करते हैं।

सीबीसी को दिए गये एक हालिया साक्षात्कार में प्रोफ़ेसर एल्वुड कहते हैं:

हम किसी भी सजीव प्रजाति में दर्द की अनुभूति को साबित नहीं कर सकते। आप केवल अध्ययन कर सकते हैं और यदि उनके निष्कर्षों में दर्द महसूस करने के संकेतों की एकरूपता रहती है तो हमें उन्हें संदेह का लाभ देना चाहिए। इसे ही हम प्रीकाउसनरी प्रिंसिपल अथवा सुरक्षात्मक सिद्धांत कहते हैं, जिसके अन्तर्गत यदि वे कुछ दर्द महसूस करते होंगे तो इससे भी उन्हें सुरक्षा मिलेगी।

अनुसंधानकर्त्ता द्वारा पूर्व में किए गये अध्ययनों में भी केंकड़े और झिंगा द्वारा दर्द से बचने के लिए व्यवहारिक संकेत प्राप्त किया गया था। वे अब इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि लोब्सटर, क्रेफिश समेत सभी डिकैपोड क्रस्टेशियन दर्द महसूस करते हैं। इस परिणाम ने प्रोफ़ेसर एल्वुड को पशु-कल्याण कानूनों की अनुपलब्धता पर प्रश्न उठाने के लिए प्रेरित किया।

दुःखद है कि संयुक्त राज्य में इन प्राणियों को नितांत मौलिक सुरक्षा भी कानूनन उपलब्ध नहीं है। कोई भी संघीय पशु-कल्याण कानून क्रस्टेशियन जीव अथवा मछलियों की सुरक्षा नहीं करता है। परिणामस्वरूप सी-फ़ुड उद्योग अनगिनत जीवों को अकल्पनीय पीड़ा एवं क्रूर मौत का शिकार बनाते हैं।

लेकिन हाल ही में स्वीट्ज़रलैंड सरकार ने नया प्रावधान लाया है जिसके अन्तर्गत लॉब्सटर को उबालते पानी में डालने से पहले बिजली के झटके या मस्तिष्क का मशीनी निष्क्रीयकरण द्वारा बेहोश करना अनिवार्य बनाया गया है।

लॉब्स्टर, केंकड़े और क्रेफ़िश की तरह ही अन्य समुद्री जीव भी दर्द महसूस करते हैं। खुशी और दुख महसूस करने के मामले में मछलियाँ कुत्ते और बिल्लियों की तरह ही संवेदनशील होते हैं।

वर्ष 2011 में मर्सी फ़ोर एनिमल द्वारा मत्स्य वधशाला पर किए गये एक गुप्त जाँच में जिन्दा मछलियों की त्वचा छीलने की घटना का पर्दाफाश हुआ था। वे कर्मचारियों के छूरे से बचने के लिए संघर्ष कर रही थी। बेचारी मछलियाँ आक्सीजन के लिए छटपटा रही थीं और वहाँ के कार्यकर्त्ता चिमटे से उनकी त्वचा उधेर रहे थे।

भयावह लगता है, न? आप स्वयं देख लीजिए।


संयोग से, इन निरीह जीवों को अनावश्यक पीड़ा से बचाने के लिए अब आपको और अधिक प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है। स्वास्थयकर, वनस्पतिक आहार अपनाकर आप अनावश्यक क्रूरता से लॉब्स्टर, केंकड़े, मछली एवं अन्य जलीय जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते

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