वनस्पतिक आहार पर्यावरण के लिए है सर्वोत्तम
अगर हम जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए कुछ नहीं करते हैं, तो वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी को विनाशकारी परिणाम, तीव्र तूफान और बढ़ते समुद्री स्तर से लेकर लाखों प्रजातियों के विलुप्त होने के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। यह सच है कि हर कोई कोई इलेक्ट्रिक कार या सौर पैनल नहीं खरीद सकता है, लेकिन पर्यावरण के लिए एक काम ऐसा है, जो हम सब कर सकते हैं, और वह है शाकाहार!

मानो या न मानो, बहुत से लोग जो पर्यावरण की परवाह करते हैं, उन्हें अब भी यह नहीं पता है कि खाद्य-पशुपालन पर्यावरण के लिए अविश्वसनीय रूप से विनाशकारी है। ये रहे केवल कुछ कारण, जो सिद्ध करते हैं कि शाकाहार किस प्रकार से पृथ्वी की रक्षा करने का सर्वोत्तम तरीका है।

यह हमारे जलमार्गों की रक्षा करता है:

मांस उद्योग में का संबंध रिकार्ड स्तर पर गंभीर जल प्रदूषण से है। आधुनिक औद्योगिक फ़ार्मों पर पशुओं का घनत्व इतना अधिक है कि उनके द्वारा उत्सर्जित मल-मूत्र पृथ्वी द्वारा उर्वरक रूप में अवशोषित नहीं किया जा सकता। दरअसल, बड़े पैमाने पर किए जा रहे पशु-कृषि ने यू.एस. में लगभग एक-तिहाई नदियों को प्रदूषित कर दिया है।

आवास विनाश को रोकता है:

कई जगहों पर, खाने के लिए पाले गए पशुओं के द्वारा खतरनाक दर पर भूमि की ऊपरी सतह की हानि के साथ-साथ प्राकृतिक वनों को भी नुकसान पहुँचता है, जिनमें महत्वपूर्ण वन्य निवास स्थान भी शामिल है। यह वन्य जीवन के लिए एक गंभीर समस्या है। इनमें से अनेक वन्य-जीवों पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। सेन्टर फ़ोर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी के अनुसार, मांस की खपत को कम करना लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के सर्वोत्तम उपायों में से एक है।

इससे पानी की बचत होती है:

पानी की खपत दोनों तरह से होती है, एक, सीधा पशुओं द्वारा उपभोग किया जाता है, और दूसरा, उन्हें खिलाने के लिए उगाये जाने वाली फ़सल के लिए। इस प्रकार मांस उद्योग जल के अपव्यय में अव्वल है। अमेरिका में पशु कृषि 56% जल का उपयोग करता है। वास्तव में, सिर्फ एक हैमबर्गर के उत्पादन के लिए 660 गैलन पानी की आवश्यकता होती है। याद रखिए इतने पानी में आप दो महीने तक स्नान कर सकते हैं।

यह वनों की कटाई रोकता है:

विश्व बैंक के मुताबिक, पशुओं के रहने और उन्हें खिलाने के लिए चारा उगाने में, खाद्य पशुपालन में एक तिहाई भू-भाग का इस्तेमाल हो रहा है। लगभग 91 प्रतिशत अमेज़ॅन वर्षावन के विनाश के लिए सिर्फ़ पशु-कृषि दोषी है।

यह महासागरों को बचाए रखता है:

जहां तक ​​हमारा संबंध है, हम किसी भी प्रकार से मछली मारने को गैरजरूरी और अत्यधिक ही मानते हैं। लेकिन 2010 में संपन्न समुद्री जीव जनगणना का अनुमान है कि महासागरों से 90 प्रतिशत सेअधिक बड़ी मछली गायब हो चुकी हैं। इसका मुख्य कारण है अत्यधिक मत्स्यहरण। इसके अलावा, फ़ैक्ट्री-फ़ार्मिंग के कारण दुनियाँ भर के महासागरों में 500 से अधिक नाइट्रोजन-बर्द्धित मृत क्षेत्रों का निर्माण हो चुका है।

यह वन्यजीव की रक्षा करता है:

घासाहारियों से लेकर शिकारी पशुओं तक, मांस उद्योग के मुनाफे के लिए दुनिया भर के जानवरों को बड़े पैमाने पर मार दिया जाता है। हर साल, भालू, कोयोट्स और लोमड़ियों सहित हजारों जंगली जानवरों को मार दिया जाता है क्योंकि उन्हें (खाद्य) पशुधन के लिए खतरा समझा जाता है।

यह जलवायु परिवर्तन से लड़ता है:

जलवायु परिवर्तन सामान्यतः हमारे अस्तित्व को सबसे अधिक चुनौती दे रहा है और सभी कारों, विमानों और परिवहन के अन्य माध्यमों को एक साथ मिलाकर भी जितनी ग्रीन-हाउस का उत्सर्जन होता है उससे कहीं अधिक सिर्फ़ खाद्य-पशुपालन से होता है। वास्तव में, सिर्फ़ वनस्पतिक आहार अपनाने से आपके कार्बन उत्सर्जन में आधे की कमी आ जाती है।

स्पष्ट है, हम अपनी थालियों से सिर्फ़ मांस को हटाकर पर्यावरण के लिए सबसे अच्छा काम कर सकते हैं। दीर्घजीवी एवं दयापूर्ण मानवीय आहार अपनाने के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए।
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