जर्मनी की अदालत ने फैक्टरी फार्म पर गुप्त जाँच को कहा वैध
हाल ही में एक जर्मनी की एक अदालत ने फैसला सुनाया कि यदि ऐसा विश्वास करने का कोई कारण है कि संबंधित अधिकारी पशु-कल्याण कानून का क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं तो पशु-कार्यकर्ताओं द्वार फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर गुप्त जाँच के अंतर्गत फोटो लेना और वीडियो बनाना कानून सही है।

इस मामले में, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि पशू-क्रूरता के दस्तावेजीकरण के लिए तीन पशु-अधिकार कार्यकर्ताओं नें एक सुअर फ़ार्म में अनधिकार प्रवेश किया था। लेकिन बाद में अभियोजन पक्ष की हार हुई और तीनों कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया गया है।

ऐतिहासिक निर्णय में यह कहा गया है कि फ़ैक्ट्री-फ़ार्मों पर फिल्मांकन के लिये गुप्त-प्रवेश किसी अधिकार क अतिक्रमण नहीं होता, बल्कि एक उचित ज़रूरत है। अदालत ने फैसला सुनाया कि गुप्तचाँच कर्ता यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसान पशु कल्याण कानूनों और नियमों का पालन कर रहे हैं।

आपराधिक अदालत के अध्यक्ष न्यायाधीश उल्फ़ मजस्ट्रक ने पाया कि कार्यकर्ता सही थे क्योंकि संबंधित फ़ार्म पर पशु कल्याण पर प्रश्नचिन्ह था। फ़ैसले में कहा गया कि कार्यकर्ताओं ने उनके पास उपलब्ध साधनों की मदद से वही किया जो उस समय जरूरी था।

शाकाहार और पशु अधिकारों की बात आने पर जर्मनी का नाम सच में सबसे पहले आता है।

इस साल की शुरुआत में, सीएनएन ने एक अध्ययन पर रिपोर्ट दिया था जिसमें पाया गया था कि जर्मनी के लोग मांस का त्याग कर वनस्पति आधारित विकल्प अपना रहे हैं। वास्तव में, 2016 में प्रकाशित किये गये 2008-2011 के आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान किया गया है कि जर्मनी में 18 से 79 वर्ष की आयु के लगभग 4.3 प्रतिशत जर्मन शाकाहारी थे। जबकि यह आंकड़ा संयुक्त राज्य अमेरिका में 3.3 प्रतिशत और इंगलैण्ड में 2 प्रतिशत था।


फ़ार्म्ड-पशुओं की सुरक्षा एवं भोजन से मांस, डेयरी एवं अंडों को अलग करने के लिये फ़ैक्ट्री-फ़ार्मों पर किये जा रहे ये कार्य अकल्पनीय रूप से पीड़ित लाखों जानवरों की मदद करेंगे।

खाने के लिए पाले गये गाय, सूअर और मुर्गे-मुर्गियाँ भी हमारे पालतू कुत्ते-बिल्लियों की तरह ही स्मार्ट और संवेदनशील होते हैं। लेकिन फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर वे अकल्पनीय क्रूरता, चरम कारावास, क्रूर अंगभंग और हिंसक मृत्यु के शिकार होते हैं।

आप स्वयं देख लीजिए


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