बस इसलिये मैं कभी दुग्ध-उत्पाद नहीं खा सकती !
जोय लोरिया की कलम से...

मुझे पनीर पसंद है। मुझे इस बात की कोई चिन्ता नहीं थी कि यह किस प्रकार बनाया जाता है। लेकिन जैसे ही डेयरी फार्मिंग के बारे में मुझे पता चला सब कुछ बदल गया। ये रही मेरी नयी सीख।

यद्यपि यह बहुत हद तक स्पष्ट है लेकिन हो सकता है, बहुत से लोग यह नहीं जानते हों कि दूध देने के लिये गायों को गर्भवती होना पड़ता है और बच्चे को जन्म देना पड़ता है। इसके लिए, डेयरी फ़ार्मों पर गायों को जबरन गर्भवती कराया जाता है। यह प्रक्रिया बेहद आक्रामक होती है, जिसमें किसान को गायों के मलद्वार (रिक्टम) में अपना पूरा का पूरा हाथ डाल देते हैं। यह लगभग हर 12 महीनों में दोहराया जाता है।

मनुष्यों की तरह ही नौ महीने तक अपने बच्चों को गर्भ में रखने के बाद गायें अपने बच्चों को जन्म देती हैं। फिर शुरु होती है असली त्रासदी। जन्म देने के कुछ ही घंटों के भीतर, इन माताओं से उनके बच्चों को छीन कर दूर कर दिया जाता है। क्यूं ? क्योंकि किसानों को चाहिये दूध। वह दूध जिस पर गायों के बच्चों प्राकृतिक आहार है, उसे किसानों के लाभ के लिये बेचा जाता है।

यह अन्तर्निहित अत्याचार हर डेयरी फार्म पर आम बात है।

इस बलपूर्वक अलगाव के कारण कई माता गायें घंटों या कई बार तो कई-कई दिनों तक परेशान रहती हैं। अक्सर अपने चुराए गए बच्चों को व्याकुलता से खोजती रहती हैं। यह पीड़ा, तनाव और निराशा वही माँ समझ सकती है जिसे पता नहीं हो कि उसका बच्चा कहाँ है।

2013 में न्यूबरी, मैसाचुसेट्स में स्थानीय लोगों ने पुलिस को बुलाया क्योंकि उन्होंने पास के डेरी फार्म से एक गाय के रोने की आवाज सुना था। जांच के बाद, अधिकारियों को पता चला कि वे गायें अपने नवजात शिशुओं की चोरी के दुःख में रो रही थी।


गंभीर भावनात्मक आघार के अतिरिक्त बारंबार गर्भधारण और व्यवसायिक दुग्ध-दोहन के इस कुचक्र का दुष्परिणाम गायों के शरीर पर पड़ता है। सामान्यतः एक गाय का प्राकृतिक जीवनकाल 25 साल तक होता है, लेकिन डेयरी फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर गायें केवल चार साल तक ही रह पाती हैं। अपेक्षित दुग्ध-उत्पादन क्षमता खत्म होते ही उन्हें वधशालाओं में भेज दिया जाता है जहाँ उनके जीते-जागते शरीर को गोमांस में बदल दिया जाता है।

देश में सबसे बड़े पनीर उत्पादकों में से एक के लिए आपूर्तिकर्ता, एंड्रस डेयरी पर वर्ष 2014 में मर्सी फ़ोर एनिमल द्वारा किये गये एक गुप्त जांच में, पशुओं के साथ चरम दुर्व्यवहार और उपेक्षा का खुलासा किया गया था। वीडियो में देखा गया कि वहाँ के श्रमिक गायों को लात, घूँसो एवं डंडे से निर्दयतापूर्वक पीट रहे थे।

आप स्वयं देख लीजिये।


अफ़सोस ! दूध के हर बूंद में पशुओं की पीड़ा और उनपर की गयी क्रूरता शामिल होती है। यह जानने के बाद मैं फिर कभी दुग्ध उत्पाद का उपयोग नहीं कर सकती।

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