नये सर्वे में खुलासा: दुनियाँ भर के लोग अपना रहे हैं शाकाहार
बात चाहे अपने स्वास्थ्य के रक्षा की हो या पर्यावरण और पशुओं को बचाने की, दुनियाँ भर में लोग पशु-उत्पादों को त्यागकर वनस्पतिक आहार अपना रहे हैं। सिर्फ़ हमारी बातों पर नहीं जाइए, इन तथ्यों एवं सर्वे को एक नजर देख लीजिए।

कम्पेयर द मार्केट डॉट कॉम और ग्रेशम कालेज प्रोफ़ेसर कैरोलिन रोबर्ट्स द्वारा करवाए गये एक हालिया सर्वे में पता चला है कि इंगलैण्ड में पिछले दो वर्षों में पूर्णतः शाकाहारी बनने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। वास्तव में, आँकड़े बताते हैं कि साढ़े तीन करोड़ लोग अपनी पहचान वनस्पतिक-आहारी के रूप में करवाते हैं। यह जबर्दस्त संख्या इंग्लैण्ड की कुल जनसंख्या का सात प्रतिशत है।

इंगलैण्ड की तरह ही ऑस्ट्रेलिया में भी शुद्ध शाकाहारियों की संख्या में भारी इजाफ़ा हुआ है। फ़ूड रेगुलेशन नेटवर्क के अनुसार, 2014 से 2016 के बीच, ऑस्ट्रेलियाई बाज़ारों में उतरने वाले वनस्पतिक उत्पादों की संख्या में लगभग 92 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है।

पशु-कल्याण एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के फलस्वरूप में जर्मनी में भी वनस्पतिक-आहार शैली का तेजी से प्रसार हो रहा है। 2008–2011 के आँकड़ों पर आधारित वर्ष 2016 में किए गये एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि 18 से 79 वर्ष तक के करीब 4.3 प्रतिशत जर्मन नागरिक पूर्णतः शाकाहारी थे। इनमें भी सर्वाधिक संख्या 18 से 29 वर्ष की आयु वालों की थी। जरा अमेरिका के 3.3 प्रतिशत जनसंख्या से इसकी तुलना कीजिए।

पौष्टिक, संधारणीय एवं संवेदनशील वनस्पतिक जीवन शैली अपनाने की बढ़ती हुई प्रवृति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। रिसर्च फ़ार्म, ग्लोबल डाटा के अनुसार, वर्ष 2014 से 2017 के बीच अमेरिका में वनस्पतिक आहार शैली का 600 प्रतिशत विस्तार हुआ। एलाइड मार्केट रिसर्च का अनुमान है कि 2015 से मांस के विकल्पों का बाज़ार 8.4 प्रतिशत की वैश्विक दर से बढ़कर 2020 तक 5.2 डॉलर तक पहुँच जाएगा।

लेकिन अचानक शाकाहार सब जगह क्यों छाया हुआ है? यह संधारणीय विकल्प अपनाने को प्रेरित करने वाले सांस्कृति परिवर्तन का परिणाम है। पिछले दशक में, जैसे-जैसे दुनियाँ की सबसे बड़ी आवादी मिलेनियल्स अर्थात नयी पीढ़ी ने अपनी खाद्य सामग्री खुद खरीदना शुरु किया है, वनस्पतिक आहारियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं पशु-कल्याण के प्रति चिंतित इस पीढ़ी में स्वयं को वनस्पतिक आहारी के रूप में परिचायित करने वाले लोगों की सबसे बड़ी संख्या है।

द न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और पशुओं को लेकर चिंतित इस पीढ़ी में सबसे ज़्यादा लोग स्वयं को वनस्पतिक आहारी के रूप में चिन्हित करने वाले हैं।

अधिक से अधिक लोग वनस्पति आधारित आहार ग्रहण कर रहे हैं, यह फ़ैक्ट्री फ़ार्मों की यातना के शिकार करोड़ों पशुओं के लिए एक सुखद समाचार है। खाने के लिए पाले और मारे जाने वाले गाय, सूअर, मुर्गे-मुर्गी और मछलियों को अकल्पनीय क्रूरताओं का समना करना पड़ता है। तंग और गंदे पिंजरों में कैद, बर्बर अंगभंग और नृशंस हत्या जैसे अत्याचारों का शिकार होना पड़ता है।

भयावह लग रहा है, न? आप स्वयं देख लीजिए।


शुक्र है कि ज़्यादा से ज़्यादा वनस्पतिक उत्पाद बाज़ार में आ रहा है। दयापूर्ण वनस्पतिक जीवन शैली अपनाने का इससे बेहतर समय और कभी नहीं हो सकता।

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