बैटरी केज में मुर्गियों के परिवहन के खिलाफ़ मेनका गाँधी ने उठाया आवाज
हैदराबाद में बैटरी केज में ले जायी जा रही मुर्गियाँ

केन्द्रीय मंत्री एवं प्रसिद्ध पशु-अधिकार कार्यकर्त्ता मेनका गाँधी द्वारा बैटरी केज में मुर्गियों के परिवहन के खिलाफ़ छेड़े गये मुहिम को अंततः सफलता मिल ही गयी। पाल्ट्री फ़ार्मों पर मुर्गियों के रख-रखाव एवं परिवहन के खिलाफ़ अभियान चलाने वाली श्रीमती गाँधी ने पाल्ट्री-पक्षियों के आवास एवं परिवहन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनूकूल देश के मौजूदा कानूनों के पुनर्मूल्यांकण का आग्रह किया है।

कानून मंत्रालय ने 2017 के शुरुआत में इस आशय के लिये एक आयोग का गठन कर रिपोर्ट देने को कहा है। उक्त आयोग ने इस साल जुलाई में अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपते हुए कानून मंत्रालय से शिफ़ारिस किया है कि बैट्री के डब्बे जैसे तंग पिंजरों में पक्षियों का परिवहन करने वालों को कठोर दण्ड दिया जाये।

खचाखच भरे तार के तंग पिंजरों, जिनकी विभेदक दीवारें बैटरी के सेल की तरह होती हैं, उनमें मुर्गियों को जबरन ठूँस दिया जाता है। ये पिंजरे अत्यंत तंग होते हैं जिसमें बेचारी मुर्गियाँ अपना स्वाभाविक क्रिया-कलाप जैसे कि उछल-कूद, धूल-स्नान इत्यादि भी नहीं कर पाती हैं। ये स्वाभाविक कार्य मुर्गियों की कुशलता एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिये आवश्यक हैं।

मुश्किल से 630 वर्ग सेंटीमीटर के एक ही पिंजरे में चार से छः मुर्गियों को ठूँस दिया जाता है जबकि ब्युरो आफ़ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक एक अकेले पक्षी के लिये भी न्यूनतम 450 वर्ग सेंटीमीटर जगह दिया जाना चाहिये।

बंगलोर के उपनगरीय इलाके के एक पाल्ट्री फ़ार्म पर बैटरी केज में बंद मुर्गियाँ

कानून आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बी एस चौहान कहते हैं:

पशु-क्रूरता अधिनियम (प्रीवेंशन आफ़ क्रूएल्टी टू एनिमल एक्ट) में संशोधनकर पशुओं पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ़ कड़ी सजा का प्रावधान अनुमोदित है।

पैनल ने आगे कहा कि:

पशुओं के परिवहन से संबंधित वर्तमान कानूनी प्रावधान भी पर्याप्त हैं और इन्हें सख्ती से लागू कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि पक्षियों को पाल्ट्री फ़ार्मों पर या परिवहन के दौरान पीड़ा नहीं झेलना पड़े। मुर्गियों के कुशलक्षेम की जिम्मेवारी, पीसीए के सेक्शन 3 के अन्तर्गत उन्हें भेजने वाले और पाने वाले और इन पक्षियों के रख-रखाव के प्रभारी व्यक्तियों पर होगी।  

इस रिपोर्ट का एकमात्र उद्देश्य पक्षियों को बैटरी केज की पीड़ा से बचाना है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोग ने मुर्गीपालकों के लिये पशुपालन विभाग से बैटरीकेज-मुक्त मुर्गीपालन का प्रमाणपत्र लेने की अनुशंषा की है।


यह कदम निश्चित रूप से इन पीड़ित पक्षियों के लिये कुछ राहत लायेगा लेकिन उनकी मदद करने का सर्वोत्तम उपाय है कि हम मानवीय दयापूर्ण वनस्पतिक आहार अपनायें। शुरु करने के लिये तैय्यार हैं? यहाँ क्लिक कीजिये।
व्यंजनों, नए उत्पाद टिप्स, और बहुत कुछ के साथ सूचित रहें
और शाकाहारी समाचार