गुप्त फ़ुटेज में दिखे भयभीत, क्षत-विक्षत, बीमार सैल्मन
सीबीसी के मुताबिक, लैच-क्विलि-टैच नेशन से विरासत के प्रमुख जॉर्ज क्वाक्शस्टर जूनियर ने पिछले महीने वैंकूवर द्वीप के पूर्वी तट पर सैमन फार्मों की यात्रा करते हुए सैल्मन फ़ार्मों की दयनीय स्थिति का दस्तावेज तैय्यार किया है।

क्वाक्शस्टर की जांच ने जीवविज्ञानी और समुद्री कार्यकर्ता एलेक्जेंड्रा मॉर्टन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सीबीसी से कहा: "मैं कम से कम पिछले 25 वर्षों से बहुत ही गंभीरता से इस क्षेत्र में हूँ लेकिन इस तरह के फुटेज मैंने कभी नहीं देखा। मैंने फिल्म में इस बात का संकेत किया है कि यह केवल एक फ़ार्म की बात नहीं है, सभी फ़ार्मों पर यही होता है।"

फुटेज में अपने मल-मूत्र में सने अंधे, दुर्बल सैल्मन को तैरते हुए दिखाया गया है। वीडियो के अनुसार, एक 17 साल की रिपोर्ट में पता चला है कि समुद्री जुओं से संक्रमित एक मछली फार्मों समुद्री सैल्मन का जीवन मुश्किल कर रहे थे।

आप स्वयं देख लीजिये।


वाशिंगटन में मछली फैक्टरी फार्म में एक नेट के असफल हो जाने से, राज्य के उत्तर-पश्चिमी सैन जुआन द्वीप समूह में हजारों गैर-अटलांटिक सैल्मन आश्रयहीन हो गये। जैसा कि क्वाक्शस्टर की रिपोर्ट में बताया गया है, अधिकारियों को इस बात कि चिंता है कि कहीं यह इस दुर्घटना से उत्पन्न समुद्री जूओं से वन्य-जीवन के लिये खतरा न बन जाये।

गंदे और तंग फ़ैक्ट्री-फ़ार्म परजीवी के पैदा होने और पलने के लिये आसान होते हैं। पिछले साल समुद्र के जूँ का प्रकोप स्कैंडिनेविया से चिली तक हुआ था। अब करीब आधा स्कॉटलैंड के सैल्मन फार्म परजीवीयों से पीड़ित हैं। ये परजीवी सैल्मन मछलियों के रक्त, त्वचा और सैल्मन की कीचड़ पर पलते हैं।

लेकिन गंदगी और उपद्रव तो बस शुरुआत है

जर्नल ऑफ़ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि मतस्य फ़ैक्ट्री फ़ार्मों में पाले गये सैल्मन को इस तरह की त्वरित दर से बढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है, कि उनमें से आधे से अधिक आंशिक रूप से बधिर हो जाते हैं। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि कई फ़ार्म्डसैल्मन गंभीर अवसाद से ग्रस्त होते हैं। ऐसे अवसाद-ग्रस्त सैल्मन को "ड्राप-आउट" कहा जाता है, जो उदास होकर गंदे टैंकों में निर्जीव रूप से फ्लोट करते रहते हैं।

फ़ैक्ट्री फ़ार्मों में उनके भयानक जीवन के बाद, अनेक मछलियों भयानक मौत का शिकार होते हैं। मछलियों के दर्द महसूस करने की क्षमता के बावजूद, समुद्री खाद्य उद्योग इन निर्दोष प्राणियों को केवल वस्तु समझता है।


मर्सी फॉर एनिमल्स ने एक मतस्य वधशाला में एक गुप्त जांच किया था, जिसमें निर्दयतापूर्वक जीवित मछालियों की खाल उतारते हुए दिखाया गया है। बेचारी मछलियाँ ऑक्सीजन के लिए छटपटा रही थी और फ़ैक्ट्री फ़ार्मों के चिमटे बेरहमी से उनकी उनकी त्वचा उतार रहे थे। मजदूरों के चाकू से बचने के लिए वे संघर्ष करते रहे। इस क्रूर मतस्य पालन उद्योग से अपना समर्थन हटाने के लिए हम सबसे अच्छी बात यह कर सकते हैं कि हमारी थालियों से मछली और ऐसे तमाम पशु-उत्पादों को अलग कर एक दयापूर्ण वनस्पतिक आहार अपनायें। और अधिक जानकारी के लिये यहाँ क्लिक कीजिये।
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