वनस्पतिक आहारियों को ‘हास्यबोध’ सुधारने की सलाह बंद कीजिए
मैं अपनी माँ के साथ गाड़ी से जा रहा था, और एनपीआर पर अपना मनपसंद गाना सुन रहा था, "वेट, वेट... डोन्ट टेल मी...!" तभी एक पूर्वानुमानित मजाक ने मुझे नाराज़ कर दिया, "मैकडॉनल्ड्स शाकाहारी बर्गर बेचने की घोषणा की है- ये वनस्पतिक आहारियों के लिए अच्छी खबर है, जो दुर्भाग्यवश हास्यबोध भी नहीं खरीद सकते।" मैं हँसा नहीं।

"कभी हल्की फुल्की बातें भी लिया करो!" मेरी माँ ने मेरी जांघ को थपथपाते हुए कहा।

ऐसा नहीं था कि मैं मजाक से नाराज़ था। मैं वनस्पतिक होने सबंधी बहुत सारी बातों पर हँसता हूँ। जैसे कि पोषण खमीर के लिए हमारा जुनून। लेकिन स्पष्ट रूप से या अंतर्निहित रूप से मैं जानवरों की कीमत पर "हास्य की भावना" की सलाह से थक गया हूं। बेशक, यह मजाक वनस्पतिक आहारियों के बारे में था, जानवरों के लिए नहीं, परन्तु मैं इस कारण से परेशान हुआ, क्योंकि कभी-कभी वनस्पतिक आहारियों को हास्य-रहित बताकर अपमानित किया जाता है। अक्सर हमें इन बातों को "हल्के" में लेने के लिए कहा जाता है लेकिन इसे हल्के में कैसे लिया जा सकता है कि सिर्फ़ लोगों के जीभ को संतुष्ट करने के लिए हर साल अरबों जानवरों के साथ दुर्व्यवहार और अंत हत्या कर दी जाती है।

मैंने अपनी माँ को इसका कुछ संस्करण सुनाया।

"मुझे पता है कि तुम क्या कह रहे हो," मेरी माँ ने केन्द्रबिन्दु पर आने से पहले स्वीकार कर लिया "लेकिन मुझे लगता है कि शाकाहारी आंदोलन को बच्चों की भूखमरी इत्यादि के बारे में बेहतर काम करना चाहिए। मेरा मतलब है, दुनिया में अन्य सभी समस्याओं के बारे में क्या सोचते हो?" यह एक और सामान्य आक्षेप है, जिस पर मेरा धैर्य जवाब देने लगा है। मैं केवल पशुओं के लिए शाकाहारी नहीं हूँ, लेकिन अगर मैं हूँ भी, तो क्या मुझे यह साबित करना होगा कि मैं लोगों का भी ख्याल करता हूं? यह एक आक्रामक माँग है कि यदि मैं महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ता हूँ तो मुझे साबित करने की जरूरत है कि मैं पुरुषों की चिन्ता भी करता हूँ।

लेकिन एक मायने में मेरी माँ सही ही कह रही थी। वनस्पतिक आहारियों को हर किसी को यह बताना चाहिए कि फ़ैक्ट्री-फ़ार्मिंग वैश्विक भूखमरी, जलवायु परिवर्तन, और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में किस प्रकार योगदान देता है। वास्तव में, वनस्पतिक आहार एक अत्यंत ही व्यापक विषय है।


पूर्णतः शाकाहारी होकर आप एक साथ कई मुद्दों के बारे में काफी कुछ करते हैं। जलवायु-परिवर्तन से लड़ने के लिए जो एक-मात्र सर्वश्रेष्ठ प्रयास जो आप कर सकते हैं वह है, पूर्णतः शाकाहार। यह आपके कार्बन उत्सर्जन में लगभग आधे की कटौती करता है। यह उन संस्कृतियों को बढ़ावा देने के लिए भी बेहतर है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से संबोधित करते हैं। मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग से लेकर कैंसर तक, मांस और डेयरी उत्पाद अनेक मानव-स्वास्थ्य समस्याओं की जड़ हैं। वनस्पतिक उत्पादों की अधिक मांग बनाने और पादप आधारित आहार के स्वास्थ्य लाभ के बारे में जागरूकता फैलाकर, हम अन्य लोगों को उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए सशक्त बनाते हैं।

शाकाहारी हो कर, आप श्रमिक -अधिकारों के साथ भी खड़े होते हैं। फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर गरीब ग्रामीण समुदायों और श्रमिकों का शोषण होता है, जिनमें से कई अनधिकृ आप्रवासी भी हैं, जो बुनियादी श्रम सुरक्षा से वंचित हो जाते हैं।

और, पूर्णतः शाकाहार तो दुनिया की भूख को कम करने में भी मदद करता है। दुनिया का लगभग 50 प्रतिशत अनाज जिससे हम लोगों का पेट भर सकते हैं, दुर्भाग्यवश खाद्य पशुओं को खिलाया जाता है। सिर्फ एक पौंड मांसका उत्पादन करने के लिए लगभग 10 पाउंड अनाज लग जाता है। कार्नेल यूनिवर्सिटी में पारिस्थितिकी के प्रोफेसर डेविड पिमेटेल कहते हैं, "अगर वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका में (खाने के लिए पाले जाने वाले) पशुओं को खिलाया जाने वाला अनाज, लोगों द्वारा सीधे खपत किया जाए, तो लगभग 8000 करोड़ लोगों का पेट भरेगा।" यह करीब-करीब दुनिया 1 अरब लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त होगा, जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है।


संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक, 2050 तक यदि हम दुनिया की पूरी आबादी को खिलाने के लिए हमें खाद्य उत्पादन में 70 प्रतिशत तक वृद्धि करना होगा। यह पशु-कृषि पर नियंत्रण किए बिना संभव नहीं होगा जिसमें अत्यधिक संसाधनों का अपव्यय होता है।

जाहिर है, वनस्पतिक आहारी बनने से हम न सिर्फ जानवरों के लिए, बल्कि लोगों और हमारे पर्यावरण के लिए भी सही दिशा में एक कदम बढ़ाते हैं। आप पूर्णतः शाकाहारी होने के साथ-साथ अन्य विषयों का ध्यान भी रख सकते हैं लेकिन सच तो यह है कि आप सिर्फ़ इस आहार को चुनकर ही जरूरत से कहीं अधिक करते हैं। हम अहिंसा और करुणा की शुरुआत अपनी थाली से कर सकते हैं, लेकिन हममें से अधिकतर हमारी सक्रियता को यहीं समाप्त नहीं करते हैं।

तो अगर आप मुझे पशुओं के जीवन की कीमत पर हंसने के लिए कह रहे हैं, या मेरे आहार-शैली का यह कर मज़ाक बनाते हैं कि मैं पृथ्वी पर अन्य जीवों की चिन्ता नहीं करता तो मुझे कोई परवाह नहीं कि आप मुझे हास्यविहीन कहें या कुछ और। दूसरों की उनकी इच्छा के विरुद्ध कैद रखना, उनकी प्रजनन प्रणाली को बलात नियंत्रित करना, उनके बच्चों को चुराना, और अपने लाभ के लिए उनके शरीर का उपयोग करना, हमारे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाना मेरी मान्यताओं के विरुद्ध है। इसमें कोई हँसने वाली बात नहीं है, और मैं इसलिए कठोर एवं तनावग्रस्त व्यक्ति के रूप में देखे जाने से थक चुका हूँ, क्योंकि मेरे कार्य औरों को उनकी नैतिक असुविधा की याद दिलाते हैं।

यहाँ, मैं अब तक गैर-शाकाहारियों से आग्रह करता हूँ कि जिस प्रकार आप अन्य सामाजिक न्याय के विषयों का सम्मान करते हैं वैसे ही वनस्पतिक आहारियों का भी सम्मान कीजिए। कई कारणों से शाकाहार का मार्ग अन्य मार्गों को परस्पर काटता हुआ प्रतीत होता है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि हमें यह साबित करने की जरूरत है कि हम मनुष्यों का भी उतना ही ध्यान रखते हैं जितना पशुओं का। और कृपया, हमसे हर दिन अनावश्यक एवं निर्दयतापूर्वक मौत के घाट उतारे जा रहे लाखों पशुओं की कीमत पर हास्य की भावना के लिए मत पूछिए बल्कि अपने आप से पूछिए कि अपनी सुविधा के लिए आपको उनकी जरूरत क्यों है। 
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