पर्यावरण के लिए प्लास्टिक है खतरनाक, लेकिन उससे भी अधिक खतरनाक है मत्स्यहरण
भारत और दुनिया भर में, डिस्पोजेबल प्लास्टिक से निजात पाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। हाल ही में, मुंबई और महाराष्ट्र में प्लास्टिक थैलों पर प्रतिबंध की खबर मुख्यधारा और सोशल मीडिया की सुर्खियों में रही थी। बॉलीवुड आइकन अमिताभ बच्चन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाला भारत का सबसे लोकप्रिय गेम-शो "कौन बनेगा करोड़पति" के पिछले सत्र में मुंबई के वकील अफ्रोज़ शाह आये थे, जो समर्पित रूप से मुंबई के समुद्र तटों को साफ करते रहे हैं। उन्होंने 2015 में अकेले इस महति कार्य की शुरुआत की थी और अब तक वे अपनी टीम के साथ मुंबई के समुद्र तटों से अविश्वसनीय 4,300 टन प्लास्टिक कचरा हटा चुके हैं। हाँ, आपने बिल्कुल सही पढ़ा है। केवल कुछ समुद्र तटों से 4,300 टन कचरा। यह अपशिष्ट न केवल घृणित बल्कि पर्यावरण के लिए अत्यंत विनाशकारी है। एकल उपयोग वाले प्लास्टिक निर्मित वस्तु निश्चित रूप से हमारे महासागरों और जलमार्गों एवं समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों को प्रदूषित करने के अहम कारक हैं, किन्तु मछली पकड़ने का धंधा उससे भी कहीं अधिक खतरनाक है।

हम इस बात से इन्कार नहीं करते हैं कि प्लास्टिक के थैले और अन्य डिस्पोजेबल प्लास्टिक सामग्री के उपयोग को सीमित करने से सागर में अपशिष्ट प्लास्टिक की मात्रा कम करने में मदद मिलेगी। वस्तुतः, नेक उद्देश्य से प्रेरित यह प्रयास पर्यावरण को प्रदूषनरहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। लेकिन हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारे महासागरों में प्लास्टिक का विशालतम कचरा जो है, वह है मछली पकड़ने के उपकरणों के रूप में।

हम यह नहीं कह रहे हैं कि हमें अपने जीवन में प्लास्टिक की मात्रा को जानबूझकर कम नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर हम इसके बारे में रणनीतिक होने जा रहे हैं, तो हमें वास्तव में वाणिज्यिक मत्स्यहरण उद्योग का बहिष्कार करना चाहिए और मछली और अन्य जलीय जीवों को खाना छोड़ देना चाहिए। आइए तथ्यों को देखें

महासगरों में प्लास्टिक की मात्रा कम करने के लिए टेक्नोलोजी विकसित करने वाले संगठन "ओशन क्लीनअप" के साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि "वृहत प्रशांत अपशिष्ट क्षेत्र" में प्लास्टिक कचरे का कम से कम 46 प्रतिशत प्लास्टिक के बने मत्स्यहरण उपकरणों के कारण आता है। यकीन मानिए, यह प्लास्टिक कचरा इतना ज़्यादा है कि यह आकार में एक देश फ़्रांस के बराबर हो सकता है।

विश्व पशु संरक्षण संस्था की रिपोर्ट के अनुसार प्रति वर्ष लगभग 640,000 टन मत्स्यहरण उपकरण हमारे महासागरों में समाहित होकर उन्हें प्रदूषित कर रहे हैं। कचरे के रूप में परिनत इन मत्स्यहरण उपरकरणों का प्रभाव केवल जल-प्रदूषण तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि यह सामुद्रिक जैव-विविधता के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है। उदाहरण के लिए, "भूतिया जाल", समुद्री निवास और समुद्री जीवन के लिए एक खतरा हैं। 2016 में अमेरिकी प्रशांत तट से छोड़े गए मछली पकड़ने वाले उपकरणों में नाहक फँसे व्हेल मछलियों के 71 मामले सामने आए थे।


इस साल की शुरुआत में, केमैन द्वीपसमूह के तट पर एक परित्यक्त वाणिज्यिक मत्स्यहरण जाल में फ़ँसे सैकड़ों मृत जीवों की हृदयविदारक तस्वीरें तेजी से वायरल हुआ था। यह भूतिया जाल कैरिबियन सागर में महीनों तक बहता जा रहा था और अपने रास्ते में आने वाले लगभग हर किसी को फँसाने और मारने की संभावना बनाता जा रहा था।

इसके अलावा, मनुष्यों द्वारा समुद्री जीवों को खाने के कारण अनगिनत शार्क, व्हेल, डॉल्फिन, समुद्री कछुए, और सूँसो की मौत के लिए ज़िम्मेदार है। नेशनल जर्नल का अनुमान है कि वाणिज्यिक मत्स्यहरण जाल में फँसे जीवों में लगभग 20 प्रतिशत "बाईकैच" या अवांछित प्राणी होते हैं, जो मछलियों के साथ-साथ यूँ ही बेकार में फँस जाते हैं।

मर्सी फॉर एनिमल, सागरगेसी, शार्कवाटर, और टर्टल आइलैंड रेस्टोरेशन नेटवर्क द्वारा जारी किए गए हालिया वीडियो फुटेज से पता चलता है कि कैसे डॉल्फिन, जलसिंघ और समुद्री पक्षी सहित अनेक समुद्री जीव नियमित रूप से वाणिज्यिक मत्स्यहरण उद्योग के जाल में फ़ँस कर मारे जा रहे हैं। जांचकर्ताओं ने पाया कि बेचारे प्राणी जाल में फँसे हुए थे, उनका शरीर कई जगह से कटा हुआ था और उनके अंगों में हुक चुभे हुए थे। उन्हें कैलिफ़ोर्निया के तट पर बेकार पड़े मछलियों के नौकाओं में घुट-घुट कर मरने के लिए छोड़ दिया गया था।

आप स्वयं देख लीजिए।


प्लास्टिक के स्ट्रा, बोतलों और थैले का उपयोग बंदकर आप खुशी महसूस कर सकते हैं लेकिन वास्तविक अर्थों में समुद्र और समुद्री जीवों को बचाने के लिए कुछ करना चाहते हैं तो सबसे अच्छा यह है कि मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों को हम अपने भोजन की थाली से दूर रखें एवं करुणापूर्ण वनस्पति आधारित आहार अपनाएँ।

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