श्रेष्ठ मसाला हल्दी
भारतीय घरों में हल्दी को शुभ माना जाता है। सदियों से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा इस पदार्थ का उपयोग रसोई में, औषधि में और यहाँ तक कि विभिन्न धार्मिक-सामाजिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। हल्दी के बिना मसाले का डब्बा पूर्ण नहीं समझा जाता है।

जमीन के अंदर बढ़ने वाला इसका तना रसोई में उपयोग किया जाता है। हम यह जानते हैं कि सामान्यतः खाने की करी और अन्य व्यंजनों को पीला रंग देने वाले इस पादप में एंटीसेप्टिक गुण पाया जाता है और यह आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण सामग्री है।

ये रहे आपके व्यंजनों में हल्दी डालने के पाँच कारण

1) यह एक उत्तम शोथरोधी है।

अध्ययनों से पता चला है कि हल्दी में उत्तम शोथरोधी गुण निहित होते हैं और यह अन्य परिस्थित्यों में भी अत्यंत सहायक हो सकता है।

2) यह अवसाद की संभावना को कम करता है।

अध्ययनों में यह दिखाया गया है कि हल्दी में पाये जाने वाला करक्यूमिन ब्रेन डिरायव्ड न्युरोट्रोफिक फ़ैक्टर (बीडीएनएफ़) बढ़ाने में सहायक होता है जो अवसाद समेत अनेक मानसिक व्याधियों को दूर रखता है।

3) मौसमी बुखार में प्रभावी।

करक्यूमिन एक प्राकृतिक एंटीहिस्टामाइन की तरह काम करता है और यह सर्दी-जुकाम और मौसमी बुखार से हमें बचाता है। इसमें निहित शोथरोधी गुण वायुगामी प्रदाह को रोक कर संक्रमणजनित बुखार की संभावना को कम करता है।

4) पाचन में सहायक।

यह पित्त-निर्माण को उत्तेजित करता है। पित्त पाचन के लिये एक महत्वपूर्ण एन्जायम है। वास्तव में, पाचन समस्या से पीड़ित लोगों को हल्दी के अनुपूरक पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है।

5) यकृत की रक्षा करता है।

विभिन्न अध्ययनों में दिखाया गया है कि हल्दी यकृत (लिवर) की रक्षा करता है, इसके विषहरण क्षमता को बढ़ता है और इसके पुनरुत्पादन में भी सहायक होता है।

इनके अतिरिक्त, हल्दी में एक विशेष चटपटापन होता है जो व्यंजनों के स्वाद को बढ़ाता है। अपने आहार में हल्दी का समुचित उपभोग सुनिश्चित करने के लिये आजमाइये इनमें से कुछ लज़ीज वनस्पतिक व्यंजन
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