चीज़ पसंद करने वालों के लिए खुशखबरी! बाज़ार में आया एक और लाजवाब वनस्पतिक चीज़
उन लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो तमाम पशु उत्पादों को अपने जीवन से दूर हटाना चाहते हैं लेकिन चीज़ के लिए उनका प्यार उन्हें पीछे खींच लेता है। एक और स्वादिष्ट वनस्पतिक चीज़ इटली से चलकर भारत स्थित सुपरमार्केट्स के शेल्फ में जगह बना रहा है। स्प्रेड, ढेले, और स्लाइस में उपलब्ध चावल आधारित वेरी का यह मोजरेला, ब्लू चीज़ और चेडर चीज़ बंगलोर, पुणे और मुंबई के गोडरेज नेचर्स बास्केट स्टोरों पर उपलब्ध होगा।

हलाँकि पिज़्ज़ा और पास्ता की धरती इटली से आने वाला यह चीज़ निश्चित रूप से स्पेशल है लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है जब वनस्पति आधारित चीज़ भारत के बाज़ारों में आया हो। हाल ही में, पुरस्कार विजेता वनस्पतिक उत्पाद निर्माता कंपनी वायोलाइफ़ ने वनस्पति आधारित चीज़ भारतीय बाज़ारों में प्रस्तुत किया था। अमेरिका और युरोप में पहले से ही लोकप्रिय वायोलाइफ़ कंपनी का दावा है कि कंपनी के वनस्पतिक उत्पादों और उनके डेयरी-आधारित समतुल्यों के स्वाद में अंतर करना मुश्किल है। और यह बिल्कुल सच है। वायोलाइफ़ के वनस्पतिक उत्पाद इतने स्वादिष्ट हैं कि विश्वास करना बड़ा कठिन है कि वे वास्तव में गाय के दूध से नहीं बने हैं।


वनस्पति आधारित चीज़ की लोकप्रियता सिर्फ़ पैकेज़्ड प्रोडक्ट के रूप में ही नहीं बढ़ी है। कई लोग अपनी रसोई में ही अपना मनपसंद वनस्पतिक चीज़ भी बना रहे हैं। वनस्पतिक चीज़ मेवा, टोफ़ू, नारियल, शक्करकंद और ऐसे अनेक प्रकार के स्वास्थ्यवर्द्धक सामग्रियों से बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, आप सोया-दूध, काजू और प्याज की कणिकाओं से घर पर ही लाजवाब अमेरिकन चीज़ बना सकते हैं। इसी प्रकार अन्तरराष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त शेफ़ तान्या द्वारा लोकप्रिय चीज़ बनाने की एक विधि है जो निश्चित रूप से आपके रसोई में आजमाने लायक है। आप काजू, बादाम, जई और अरारोट के मिश्रण से ‘इंस्टैन्ट मैक ऐण्ड चीज़’ भी बना सकते है।

चाहे स्टोर से खरीदकर हो या घर में बनाकर, वनस्पति आधारित चीज़ गायों को आजीवन पीड़ा से बचाते हैं।

अधिकतर चीज़ गाय के दूध से बने होते हैं। गाय को निरंतर दूध देते रहने के लिए बारंबर एक अत्यंत ही आक्रामक एवं तनावपूर्ण कृत्रिम प्रक्रिया से बलात गर्भधारण करना पड़ता है।

मनुष्य की तरह ही नौ महीनों तक अपने गर्भ में बच्चों को पालने के बाद गायें अपने बच्चों को जन्म देती हैं। मगर नवजात बछड़े-बछड़ियों को उनके जन्म के महज कुछ घंटो के भीतर ही उनकी माँओं से छीन लिया जाता है। यह अत्यंत निर्दयी अभ्यास सभी डेयरी फ़ार्मों पर एक समान रूप से चलता है, तथाकथित ‘आर्गेनिक’ ‘हैप्पी’ डेयरी फ़ार्मों पर भी। समझा जा सकता है कि बच्चों से इस बलपूर्वक विलगाव से नवप्रसूता गायें कई घंटो और कई-कई बार तो अनेक दिनों तक दुखद विलाप करती रहती हैं। यह दुर्व्यवहार भी हर डेयरी फ़ार्म पर सामान्य बात है।

वर्ष 2013 में, न्यूबरी, मेसाच्युएट्स के निवासियों ने नजदीक के एक डेयरी फ़ार्म से गायों के रोने की आवाज़ सुनकर पुलिस को बुलाया था। जाँच के बाद पुलिस ने पाया कि यह करुण क्रंदन उन गोमाताओं का था जिनके नवजात बच्चों को उनसे छीन लिया गया था। है न, हृदयविदारक? वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिखाया है कि माँ और बच्चे का स्नेहिल संबंध सिर्फ़ मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है। जरा उस पीड़ा और तनाव की कल्पना कीजिए जिससे गोमाताओं को बारंबार गुजरना पड़ता है जब वे तमाम कष्ट सहकर महज छीन लिए जाने के लिए ही अपने बच्चों को जन्म देती हैं।


सिर्फ़ गोमाताओं का कष्ट ही काफ़ी नहीं है, उनके बच्चों को भी इसी क्रूर भाग्य का सामना करना पड़ता है। नर-बछड़े को मांस (वील) के लिए मार दिया जाता है और मादा बछड़ियों को सिर्फ़ इसलिए पाला जाता है कि आगे चलकर वे बूढ़ी और दुग्धरहित या कम दूध देने वाली, डेयरी फ़ार्मों के लिए अनुपयोगी हो चुकी गायों की जगह ले सकें।

डेयरी सिर्फ़ पशुओं के लिए ही अकल्पनीय रूप से क्रूर नहीं है बल्कि यह पर्यावरण और हमारे स्वास्थ्य के लिए भी चिंताजनक है।

अनगिनत अध्ययनों में यह खुलासा हुआ है कि डेयरी मानव-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उदाहरण के लिए, प्रति दिन दो गिलास गाय का दूध सेवन करने से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसके विपरीत, डेयरी को छोड़कर सोया उत्पादों का सेवन करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की संभावनाओं में 43 प्रतिशत की गिरावट पायी गयी। डेयरी उत्पादों के उपभोग से मधुमेह, मोटापा और हृदयरोग का जोखिम भी बढ़ जाता है।

और पर्यावरण के लिए, नेचुरल रिसोर्सेस डिफ़ेंस काउंसिल (प्राकृतिक संसाधन सुरक्षा परिषद) ने तो चीज़ को सबसे बेकार पाँच खाद्य पदार्थों की सूची में शामिल कर रखा है। हमारे अस्तित्व को चुनौती देने वालों में ‘जलवायु परिवर्तन’ निश्चित रूप से अग्रणी है। खाने के लिए पाले जाने वाले पशुओं के द्वारा सभी कार, विमान एवं परिवहन के सभी साधनों को एक साथ मिलाने से भी अधिक ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है। वनस्पतिक जीवन शैली आपके कार्बन उत्सर्जन को अविलंब आधा कर देता है।

चीज़ पसंद करने वालों के लिए हमें खेद है किन्तु सच्चाई यही है कि चाहे आप जिस भी प्रकार से चीज़ का इस्तेमाल करें, डेयरी निर्मित चीज़ सब्दशः बेकार हैं। लेकिन अब भारत में उपलब्ध चीज़ के वनस्पतिक विकल्पों की मदद से आप हिंसारहित मनपसंद चीज़ का आनंद ले सकते हैं।

आपके तमाम पसंदीदा व्यंजनों की तलब को संतुष्ट करने के लिए उपलब्ध इतने सारे पादप-आधारित विकल्पों के बीच, मांस, अंडा और दुग्ध उत्पादों को अपने भोजन की थाली से दूर करने का इससे अच्छा समय और कभी नहीं हो सकता। डेयरी और अन्य पशु-उत्पादों का परित्यागकर दयापूर्ण वनस्पतिक जीवन अपनाइए। शुरु करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए।
व्यंजनों, नए उत्पाद टिप्स, और बहुत कुछ के साथ सूचित रहें
और शाकाहारी समाचार