क्रेफ़िश के मरने का वायरल वीडियो हमें शोकमग्न कर गया !
टोरंटो फ़िश सेव द्वारा पोस्ट किए गए एक उबलते हुए बर्तन के किनारे से लटके असहाय क्रेफ़िश का एक हृदयविदारक वीडियो इंटरनेट पर छाया हुआ है। अपने पंजे के बल पर भीषन संघर्ष करता हुआ यह बेचारा जीव मरना नहीं चाहता है।

यह भावुक कर देने वाला वीडियो आप स्वयं ही देख लीजिए:


क्रेफ़िश या किसी भी क्रस्टेसियन (कड़े खोल वाला जीव) को खाना कहीं से भी दयापूर्ण नहीं है। प्रायः जिन्दा ही उबाल दिए गये इन जीवों को असहय पीड़ा का सामना करना पड़ता है। कई लोग यह मानते हैं कि मछली या क्रस्टेसियन जीव दर्द महसूस नहीं करते, लेकिन यह सच्चाई से बहुत दूर है। जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी में प्रकाशित एकअध्ययन के अनुसार, केंकड़े, लॉब्सटर और मछली दर्द महसूस करने की क्षमता रखते हैं।

खाने के लिए पाली और मारी जाने वाली मछलियाँ नारकीय जीवन जीने को अभिशप्त होती हैं। गंदे और तंग फ़िश फ़ैक्ट्री-फ़ार्म परजीवियों के प्रजनन एवं वृद्धि के लिए अनुकूल होते हैं। पिछले वर्ष समुद्री जूँओं का संक्रमण स्कैंडेविया से चीली तक फ़ैल गया था। अभी स्काटलैंड के आधे से अधिक सैल्मन फ़ार्म इन जीवों के रक्त, त्वचा एवं मल-मूत्र पर पलने वाले परजीवियों से संक्रमित हैं।

फ़िश फ़ैक्ट्री फ़ार्म न केवल गंदे और तंग बल्कि जघन्य क्रूर होते हैं। जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलोजी के मुताबिक इन फ़ार्मों पर सैल्मन मछलियों को इस द्रुत गति से बढ़ने के लिए नस्लीकृत किया जाता है कि उनमें से आधे से अधिक बहरे हो जाते हैं। एक और अध्ययन में पाया गया है कि कई सैल्मन गहरे अवसाद से पीड़ित होते हैं। इन अवसादग्रस्त सैल्मन को ‘ड्रॉप-आउट’ कहा जाता है जो पानी की सतह पर बेजान से तैरते रहते हैं।

सौभाग्यवश, इन संवेदनशील जीवों की मदद करने के लिए आपको और अधिक प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है। सुस्वादु एवं स्वास्थ्यकर वनस्पति आधारित आहार चुनकर आप लॉब्सटर, केंकड़े मछलियों जैसे अनेकानेक समुद्री जीवों की क्रूरतम यातना एवं नृशंस हत्या से सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

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