वायरल वीडियो: किंडरगार्टन के बच्चों के लिए सूअर काटने से मचा हंगामा
चीन में बालवाड़ी (किंडरगार्टन) कक्षा के बच्चों के सामने एक सूअर के काटे जाने का वीडियो वायरल होने के कारण बड़ा विवाद हो गया है।

फ़ुवावा किंडरगार्टन के शिक्षक ने बाबर्ची (शेफ) की तरह सफ़ेद कोट और टोपी पहन कर बच्चों के समक्ष ही सूअर को काटकर बच्चों को उसके अंगों को दिखा रहे थे। स्कूल ने दावा किया है कि यह शारीरिक-संरचना (एनाटमी) के एक अध्याय के बाद प्रायोगिक कक्षा के तौर पर आयोजित किया गया था। "पाठ" के बाद, सुअर का मांस बच्चों और उनके माता-पिता को खिलाया गया था।


8 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा देखे गये इस वीडियो पर हजारों टिप्पणियाँ आयी हैं। इनमें से कई टिप्पणियों में पशु-बध देख रहे शिशुओं की कुशलता पर चिंता भी जतायी गयी है। यह उचित चिंता है। अध्ययनों से पता चलता है कि वधाशालाओं के श्रमिक अक्सर आघात से संबंधित अवसाद (पीएसटीडी) से पीड़ित रहते हैं।

लोग शायद अभी तक यह नहीं समझ पाये हैं कि केवल बच्चों के सामने ही नहीं बल्कि पशुओं की हत्या कहीं भी और कभी भी नहीं करनी चाहिए।

फ़ार्म्ड पशु भी हमारे घरों में पलने वाले कुत्तों और बिल्लियों के समान बुद्धिमान और संवेदनशील होते हैं। मुर्गे-मुर्गियाँ 100 से ज्यादा व्यक्तियों को पहचान सकते हैं और गायें घनिष्ठ मित्रता करने में सक्षम होती हैं। सूअरों की बुद्धि एक तीन साल के बच्चे की बुद्धि के बराबर होती है और इन्हें दुनिया में पाँचवाँ सबसे बुद्धिमान प्राणी माना जाता है। वे चिम्पांजियों की तुलना में अधिक ध्यान और सफलता के साथ वीडियो गेम खेलने के लिए जाने जाते हैं।

लेकिन फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर सूअर और अन्य जानवर अकथ्य क्रूरता के शिकार होते हैं।

मादा सूअर अपने पूरे जीवन काल तक कठोर धातु के तंग पिंजरों में कैद रहती हैं जहाँ उनका आराम से लेटना या घूमना-फिरना तक असंभव होता है।

सूअर शावकों को बिना कोई दर्दनिवारक दिये उनका अंडकोष काटकर फेंक दिया जाता है। कभी-कभी लापरवाही के साथ किये गये अण्डाकर्षण के कारण बेचारे पशुओं को अंत्रवृद्धि (हेरनियेटेड इंटेस्टाइन) का शिकार भी होना पड़ता है। तेजी से नहीं बढ़ने वाले सूअरों को सिर के बल फ़र्श पर पटककर निर्दयतापूर्वक मार दिया जाता है। पोर्क-उद्योग में ये क्रूर प्रथायें एक आम बात है।

विश्वास नहीं होता? मर्सी फ़ोर एनिमल द्वारा वॉलमार्ट पोर्क आपूर्तिकर्ता के ठिकानों पर किये गये गुप्त जांच की वीडियो देखिए।


जब हम बच्चों को पशुओं के बारे में पढ़ाते हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि सभी पशुओं के लिए उनका जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें कठोर कारावास, दुःख और वध से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। हमें अपने बच्चों को करुणा का पाठ पढ़ाना चाहिए। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम अपनी थालियों से पशु-उत्पादों को अलग रखें।

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