वाह! अध्ययन में खुलासा: आधे से ज़्यादा कैनेडियाई नागरिक करते हैं शाकाहार
अग्रणी मार्केट रिसर्च कंपनी मिन्टेल द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार आधे से अधिक कैनेडियाई नागरिक मांसाहार का वनस्पतिक विकल्प ग्रहण करते हैं।

अध्ययन में खुलासा होता है कि कनाडा के 53 प्रतिशत नागरिक वनस्पति-आधारित मांस खाते हैं। इनमें से 18 से 20 प्रतिशत लोग इसे सप्ताह में कुछ बार खाते हैं।

इससे भी आगे बढ़कर देखें तो, 5 प्रतिशत कैनेडियाई नागरिक शाकाहारी हैं और 2 प्रतिशत पूर्णतः वनस्पतिक आहारी हैं। 21 प्रतिशत कैनेडियाई नागरिक कहते हैं कि मांसों का वनस्पतिक विकल्प अधिक स्वास्थ्यकर है। इससे साबित होता है कि मांसाहार के संबंध में लोगों की धारणा बदल रही है।

जहाँ तक वनस्पति आधारित मांस के प्रकारों का संबंध है, 34 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे प्रायः निरामिष बर्गर खाते हैं, जबकि 32 प्रतिशत ने कहा कि वे वनस्पतिक चिकेन खाते हैं। लगभग 25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे वनस्पतिक हॉट डॉग, डेली साउसेज और बेकन खाते हैं।

मिन्टेल में खाद्य एवं पेय विभाग के निदेशक जोएल ग्रेगरी ने कहा:

“मांस के वनस्पतिक विकल्पों को खाद्य-नवोन्मेष में अग्रणी हथियार के तौर पर देखा जा सकता है। हलाँकि इस बात का कोई संकेत नहीं हैं कि कनाडा के लोग निकट भविष्य में वृहत पैमाने पर मांसाहार छोड़ देंगे, लेकिन यह इस बात का द्योतक है कि लोग भोजन के विकल्पों में अधिक लचीलापन चाहते हैं। मांस का सीमित उपभोग भी एक प्रकार का लचीलापन है।”

यह कोई पहला अध्ययन नहीं है जो बताता है कि कनाडा के लोग अधिकतर वनस्पति आधारित विकल्पों को चुन रहे हैं। पिछले वर्ष, गूगल के सलाना सर्वे में कनाडा के टॉप-ट्रेन्डिंग सर्चेस (खोज) में किचन कैटेगोरी में "प्लांट बेस्ड डायट" अर्थात वनस्पति आधारित आहार को भी देखा गया था।

और, केवल कैनेडियाई लोग ही अपने आहार में वनस्पतिक उत्पादों को शामिल नहीं कर रहे, बल्कि वे मांसाहार के त्याग की वैश्विक प्रवृत्ति का महज एक हिस्सा हैं। पिछले दशक में, जब से दुनियाँ की नयी आबादी अपना भोजन स्वयं खरीदने लगी है, वनस्पतिक आहार में सुदृढ़ उन्नति हुई है। द न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं पशुओं के प्रति सचेष्ट इस पीढ़ी में, वनस्पतिक आहारी के रूप में अपनी पहचान बताने वाले सर्वाधिक लोग हैं।

अधिक से अधिक लोगों द्वारा वनस्पतिक आहार अपनाना फ़ैक्ट्री फ़ार्मों पर घोर यातना के शिकार करोड़ों पशुओं के लिए एक शुभ समाचार है। खाने के लिए पाले एवं मारे जाने वाले गाय, सूअर, मुर्गे-मुर्गी और मछलियों को तंग और गंदे पिंजरों में कैद, भयावह अंगभंग एवं बर्बर हत्या जैसे अकल्पनीय अत्याचारों का सामना करना पड़ता है।

खतरनाक लगता है, न? आप स्वयं देख लीजिए:


शुक्र है कि जैसे जैसे अधिक से अधिक सुस्वादु वनस्पतिक उत्पाद बाजार में आ रहे हैं, दयापूर्ण वनस्पतिक जीवन शैली अपनाने का इससे अच्छा समय नहीं हो सकता है।

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