समुद्री जीवों को मत मारिये! आ रहा है हिंसारहित स्वच्छ मांस
हम इधर कुछ सालों से हिंसारहित स्वच्छ मांस के बारे में सुन रहे हैं। कोशिकीय कृषि का यह कदम एक रोगाणुरहित पद्धति है जिसमें मांस का निर्माण पशुओं के शरीर से अलग कोशिकाओं द्वारा किया जाता है, यह खाद्य पशुओं एवं पर्यावरण के हित के लिए अपार संभावनाएँ रखता है। इसका अर्थ यह है कि इसके द्वारा पशुओं का वध या उनपर अत्याचार किए बिना खाद्य मांस का निर्माण हो सकता है। अर्थात इसके फलस्वरूप प्रति वर्ष करोड़ों पशुओं की जान बच जाएगी। खाद्य-पशुपालन में लगने वाले संसाधन की तुलना में इसके उत्पादन में संसाधन भी बहुत कम लगेंगे।

वैज्ञानिकों ने आशा व्यक्त किया है कि जल्दी ही स्वच्छ मछली भी एक हकीकत होगी। वास्तव में, फ़िनलेस फ़ूड्स नामक एक स्वच्छ मछली उत्पादन करने वाली नयी कंपनी ने हाल ही में 35 करोड़ का निवेश प्राप्त किया है। कंपनी का कहना है कि इसके साथ अनुसंधान एवं विकास का आरंभिक चरण संपन्न हो जायेगा।

देखिए, फ़िनलेस फ़ुड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक सेल्डन क्या कहते हैं:

यह निवेश हमें स्वादिष्ट, सुरक्षित, स्वास्थ्यकर खाद्य मांस उत्पादन करने के लिए अपनी तकनीक को सुदृढ़ करने का अवसर देता है। यह हमारी पूरी टीम के लिए सच में बहुत उत्साहबर्धक है। हमने पहले ही लागत को प्रभावशाली तरीके से कम कर रखा है और बहुमूल्य कोशिकीय पदार्थ को सुरक्षित कर रखा है जिससे हमें दशक नहीं बल्कि कुछ ही वर्षों में, तेजी से इसके व्यवसायिक उत्पादन में मदद मिलेगी।

सेल्डन का अनुमान है कि फ़िनलेस फ़ुड्स उच्च गुणवत्तायुक्त ब्लुफ़िन ट्युना जैसी स्वच्छ मछली भोजनालयों को बेच कर बाज़ार में तहलका मचायेगा। इसके अतिरिक्त कंपनी अल्बाकोर और चीपजैक ट्युना के सस्ते विकल्पों पर भी काम कर रही है, जो कंपनी के आशानुरूप सुपरमार्केट में बेची जाएँगी।

स्वच्छ मछली का प्रचलन मछलियों एवं उन जलीय जीवों के लिए युगांतकारी होगा, जो क्रूरतम व्यवसायिक मत्स्यहरण उद्योग एवं मछलीपालन केन्द्रों पर अकल्पनीय पीड़ा के शिकार होते हैं। मर्सी फ़ोर एनिमल ने हाल ही में कैलिफ़ोर्निया के तट पर कैमरे में कैद किया गया एक अभूतपूर्व अंडरकवर वीडियो फ़ुटेज जारी किया था जिसमें वाणिज्यिक मत्स्यहरण उद्योग द्वारा मछलियों पर किए जाने वाले जघन्य अत्याचारों का पर्दाफाश होता है। जाल में फँसे अनगिनत समुद्री जीवों को घुट-घुटकर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।

आप स्वयं देख लीजिए:


साफ़ कहें तो, मछलीपालन केन्द्र मछलियों के फ़ैक्ट्री-फ़ार्म से अलग कुछ भी नहीं है। सैल्मन जैसे जलीय जीवों को गंदे तालाब में ठूँस दिया जाता है जहाँ वे अपने ही मल-मूत्र के बीच जीने को अभिशप्त होते हैं। रोगों का बेलगाम संक्रमण होता रहता है। वर्ष 2016 में, स्कैंडिनेविया से लेकर चीली तक, सैल्मन फ़ार्म समुद्री जूँओं के संक्रमण शिकार हुए थे। फलस्वरूप स्काटलैंड के आधे से अधिक सैल्मन फ़ार्मो उन परजीवियों से संक्रमित हुए थे जो सैल्मन मछलियों के रक्त, त्वचा और मलमूत्र पर पलते हैं।

मछलियों के दर्द महसूस करने की क्षमता के बावजूद, मत्स्य उद्योग इन निरीह प्राणियों के साथ महज बेजान वस्तुओं जैसा व्यवहार करता है।

शुक्र है कि मछलियों को अपनी थाली से अलग करने के लिए आपको स्वच्छ मछली के आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। समुद्र प्रेरित अद्भुत वनस्पतिक आहारों एवं व्यंजनों की प्रचुरता के कारण हिंसा से समझौता किए बिना वही स्वाद प्राप्त करना इतना आसान कभी नहीं था।

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